Overview
अपने उद्घाटन संबोधन में UIA India Chapter सेमिनार “Artificial Intelligence – Prevention and Resolution of Disputes” में, जो Karnataka Judicial Academy, Bengaluru में आयोजित हुआ, Chief Justice of India (CJI) Surya Kant ने कहा कि न्यायनिर्णय विवेक का अभ्यास है, गणना नहीं। उन्होंने न्याय प्रणाली को सुगम बनाने में AI की संभावनाओं को स्वीकार किया, पर जीवन‑या‑स्वतंत्रता के निर्णय मशीनों को सौंपने के खिलाफ चेतावनी दी।
Key Developments
- AI डेटा पैटर्न का विश्लेषण कर सकता है और ड्राफ्ट तैयार कर सकता है, लेकिन यह मानव पीड़ा को समझ नहीं सकता या परिणामों की जिम्मेदारी नहीं ले सकता।
- CJI ने चेतावनी दी कि अंतिम न्यायिक निर्णय मानवों के पास ही रहने चाहिए ताकि जवाबदेही और नैतिक निर्णय बना रहे।
- उन्होंने चल रहे न्यायिक प्रौद्योगिकी पहलों जैसे SUVAS को उजागर किया, जो भाषा बाधाओं को पाटते हैं।
- AI‑सक्षम उपकरण मध्यस्थता और ODR में उपयोग हो रहे हैं, जो सामान्य आधार पहचानने और समझौता ढाँचे सुझाने में मदद करते हैं।
- CJI ने AI आउटपुट की मजबूत निगरानी, सत्यापन और मानव पर्यवेक्षण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
Important Facts
• यह संबोधन 23 March 2026 को दिया गया था।
• AI की भूमिका एक सहायक साधन के रूप में परिभाषित की गई है – उदाहरण के तौर पर, विशाल कानूनी डेटाबेस से संबंधित पूर्वनिर्णयों को खोजने में जजों की मदद करना।
• CJI ने न्यायपालिका की भविष्य की चुनौती को “AI को कैसे नियमन और एकीकृत किया जाए” बताया, बिना सहानुभूति, समानता और जवाबदेही जैसे मूल मूल्यों से समझौता किए।
Exam Relevance
यह भाषण कई GS विषयों को छूता है:
- Polity (GS2): न्यायपालिका की संवैधानिक भूमिका, CJI का पद, और न्यायिक जवाबदेही की आवश्यकता।
- Technology & Governance (GS3): Artificial Intelligence का उभरता प्रभाव ...