वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने DGFT Norms Committees (NCs) के कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए कई सुधार लागू किए हैं। उद्देश्य Advance Authorisation (AA) Scheme और Duty‑Free Import Authorisation (DFIA) Scheme की टर्नअराउंड टाइम को कम करना है, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होगी।
मुख्य विकास
- NC संचालन को मानकीकृत करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए गए, जिसमें नियत द्वि-साप्ताहिक बैठक शेड्यूल और लंबी अवधि के मामलों को प्राथमिकता देना शामिल है।
- तकनीकी क्षमता में वृद्धि: दस अतिरिक्त तकनीकी सदस्य नामित किए गए, जिससे कुल 12 से 22 हो गया।
- पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्रमिक केस हैंडलिंग के साथ एक विशेष निपटान अभियान शुरू किया गया।
- पेंडेंसी और केस उम्र की व्यवस्थित निगरानी, और दोहराव वाले मामलों को दोहराव वाले अनुमोदनों से बचने के लिए SION में परिवर्तित किया गया।
महत्वपूर्ण तथ्य (जन‑अप्रैल 2026)
- जनवरी 2026 से 7 अप्रैल 2026 के बीच, 38 NC बैठकों का आयोजन किया गया।
- कुल 3,925 मामलों को उठाया गया; 1,770 मामलों को निपटाया गया, जिससे बैकलॉग में उल्लेखनीय कमी दर्शाती है।
- तकनीकी प्राधिकरण की शक्ति 83% (12 से 22 सदस्यों) बढ़ी, जिससे क्षेत्रीय विशेषज्ञता में सुधार हुआ।
UPSC प्रासंगिकता
ये सुधार सरकार की व्यापार को सुगम बनाने वाले माहौल को सृजित करने पर केंद्रित होने को दर्शाते हैं, जो GS3: Economy में बार‑बार उभरता विषय है। Foreign Trade Policy (FTP) और इसके संबंधित स्कीमों की कार्यप्रणाली को समझना निर्यात प्रोत्साहन, MSME समर्थन और व्यापार सुविधा से जुड़े प्रश्नों के लिए आवश्यक है।
