कृषि में क्रेडिट प्रवाह को मजबूत करने के लिए सरकारी उपाय
The Ministry of Finance ने कृषि क्षेत्र, विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों को संस्थागत क्रेडिट का विस्तार करने के उद्देश्य से नीति कदमों का पैकेज घोषित किया है। इन उपायों में उच्च कोलेटरल‑फ्री ऋण सीमाएं, विस्तारित क्रेडिट कार्ड, ब्याज सबवेंशन और एक नया क्रेडिट‑केंद्रित योजना, PM Dhan Dhaanya Krishi Yojana (PM‑DDKY) शामिल हैं।
मुख्य विकास (बुलेट पॉइंट्स)
- कोलेटरल‑फ्री अल्पकालिक कृषि ऋण सीमा को प्रत्येक उधारकर्ता के लिए ₹2 lakh तक बढ़ाया गया (पहले ₹1.60 lakh) जो 1 Jan 2025 से प्रभावी होगा।
- KCC योजना का व्यापक कवरेज, जिसमें पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन शामिल हैं।
- MISS के कार्यान्वयन से 7 % ब्याज दर प्रदान की गई, साथ ही समय पर पुनर्भुगतान के लिए अतिरिक्त 3 % रिबेट, जिससे प्रभावी दर 4 % हो जाती है।
- PM‑DDKY का लॉन्च, ताकि कम कृषि क्रेडिट वितरण वाले जिलों में पर्याप्त दीर्घकालिक और अल्पकालिक क्रेडिट सुनिश्चित किया जा सके।
- कृषि और सहायक गतिविधियों के लिए वार्षिक GLC लक्ष्य निर्धारित किए गए, जिसमें क्षेत्र‑वार, एजेंसी‑वार और ऋण‑श्रेणी विशिष्टताएँ शामिल हैं।
- PSL अनुपालन को सुदृढ़ किया गया: बैंकों को प्राथमिक क्षेत्रों को कम से कम 18 % ANBC/CEOBSE आवंटित करना अनिवार्य है, जिसमें Small and Marginal Farmers (SMFs) के लिए 10 % उप‑लक्ष्य शामिल है।
- NABARD द्वारा तकनीकी उन्नयन और तरलता प्रवाह के माध्यम से ग्रामीण वित्तीय संस्थानों को बढ़ी हुई सहायता प्रदान की गई।
महत्वपूर्ण तथ्य
कृषक समुदाय का 86 % से अधिक हिस्सा SMF श्रेणी में आता है, जिससे कोलेटरल‑फ्री cr
