अवलोकन
IITM, Pune की एक शोध टीम ने केरल में डेंगू के मौसमी पैटर्न को मापित किया है। अध्ययन दर्शाता है कि लगभग 60% मामलों दक्षिण-पश्चिम मानसून (June‑September) के दौरान होते हैं, जो राज्य के वर्षा चक्र को प्रतिबिंबित करता है।
मुख्य विकास
- वर्षा, आर्द्रता और El Niño‑Southern Oscillation (ENSO) को संचरण के मुख्य चालक के रूप में पहचाना गया।
- भविष्य के machine‑learning models 2021‑2040 के लिए डेंगू जोखिम में 16‑20% वृद्धि और उच्च‑उत्सर्जन परिदृश्यों के तहत 2081‑2100 तक 113% वृद्धि का प्रक्षेपण करते हैं।
- मॉडल जलवायु‑संचालित early warning system और दीर्घकालिक जोखिम योजना की आवश्यकता को उजागर करता है।
- प्रकोप को अनुकूल स्थानीय जलवायु थ्रेशोल्ड: प्री‑मानसून तापमान 30.5°C‑32.5°C, आर्द्रता 66%‑79%, और मानसून वर्षा 180‑450 mm प्रति माह।
महत्वपूर्ण तथ्य
अध्ययन, जो GeoHealth में प्रकाशित हुआ, Pune University, ICMR‑National Institute of Translational Virology, Kerala University of Health Sciences और Government Medical College, Thrissur के सहयोगियों को शामिल करता है। डेंगू के मामले मई में बढ़ना शुरू होते हैं, जून‑जुलाई में शिखर पर पहुँचते हैं, और मानसून के बाद वार्षिक परिवर्तन दिखाते हैं, जो वर्षा वितरण में स्थानिक अंतर को दर्शाते हैं।
शोधकर्ता नोट करते हैं कि जलवायु परिवर्तन और बदलते मानसून पैटर्न भविष्य में रोग की घटना को बढ़ा सकते हैं।