Overview
30 अगस्त 2026 को, ISRO ने GSLV का उपयोग करके अपना पहला जियोसिंक्रोनस इमेजिंग सैटेलाइट EOS‑05 सफलतापूर्वक स्थापित किया। लॉन्च तकनीकी रूप से एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन नौ कर्मचारी संघों ने एक साथ अध्यक्ष को एजेंसी की दीर्घकालिक स्टाफिंग, भर्ती और आउटसोर्सिंग योजनाओं पर स्पष्टता की मांग करते हुए पत्र लिखा।
Key Developments
- कर्मचारी समूह भविष्य की स्टाफ़ स्ट्रेंथ, भर्ती और मुख्य कार्यों के आउटसोर्सिंग की सीमा पर लिखित नीति चाहते हैं।
- ISRO ने आश्वासन दिया है कि इसे "निजीकरण या घटाया नहीं जाएगा"; IN‑SPACe ने कहा कि एजेंसी "कम नहीं होगी" लेकिन निजी उद्योग की भूमिका को बढ़ना चाहिए।
- 2023 की Indian Space Policy ने इस बदलाव के लिए अनिश्चित भविष्यकालीन समयसीमा निर्धारित की है।
- बजट तुलना: NASA का बजट भारत के Department of Space के बजट से लगभग 16 गुना अधिक है, जो वित्तीय क्षमता में अंतर को दर्शाता है।
Important Facts
नीति दिशा NASA के पोस्ट‑एपोलो डाउनसाइज़िंग को दर्शाती है, जो 1966 में US GDP के 0.7% से आज 0.1% तक घट गई है। ISRO, शुरुआती NASA के विपरीत, हमेशा Walchandnagar और L&T जैसे निजी निर्माताओं के साथ साझेदारी करता रहा है। भारत में उभरता “स्पेस स्टार्टअप” इकोसिस्टम सैटेलाइट डेटा सेवाओं पर केंद्रित है, न कि हार्डवेयर उत्पादन पर।
चीन का तेज़ी से विस्तारशील अंतरिक्ष कार्यक्रम एक रणनीतिक चिंता बना हुआ है, हालांकि लेख में कहा गया है कि भारत ने अभी तक इसके साथ गंभीर रूप से सामना नहीं किया है।
Exam Relevance
ISRO की विकसित होती भूमिका को समझना कई GS पहलुओं को छूता है।