समीक्षा
The ISRO successfully placed the EOS-05 into a transfer orbit on शुक्रवार, 5 सितंबर 2026. Onboard thrusters will raise the satellite to a circular geosynchronous orbit at roughly 36,000 km altitude in the coming weeks.
मुख्य विकास
- जियोसिंक्रोनस कक्षा में पहला भारतीय अर्थ‑इमेजिंग सैटेलाइट, जो लो‑ऑर्बिट प्लेटफ़ॉर्म से परे अवलोकन क्षमता को विस्तारित करता है।
- लॉन्च ISRO के 2026 के पहले सफल मिशन को चिह्नित करता है और 2021 की क्रायोजेनिक‑स्टेज विफलता के बाद भरोसा पुनः स्थापित करता है।
- मई 2025 और जनवरी 2026 में PSLV की लगातार हालिया विफलताओं ने विश्वसनीयता संबंधी चिंताओं को उजागर किया।
- समय नेपाल में भोटे कोशी बाढ़ के बाद तेज़ आपदा मूल्यांकन की आवश्यकता के साथ मेल खाता है।
- पंजाब में बाली‑आग पैटर्न जैसे मौसमी रुझानों की पुष्टि करने की संभावना, ध्रुवीय‑कक्षा वाले सैटेलाइट डेटा को पूरक करती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
EOS‑05 के सेंसर कई तरंगदैर्ध्य में परावर्तित प्रकाश को कैप्चर करते हैं, जिससे वनस्पति, जल और निर्मित क्षेत्रों के बीच अंतर किया जा सकता है। क्योंकि यह पृथ्वी से बहुत ऊँचा स्थित है, यह लो‑ऑर्बिट सैटेलाइट की तरह अल्ट्रा‑फाइन विवरण नहीं दे सकता, लेकिन यह एक ही विस्तृत क्षेत्र को दिन में कई बार दोबारा देख सकता है, जिससे बाढ़, चक्रवात, वन आग और भूमि‑उपयोग परिवर्तन पर निकट‑रियल‑टाइम अपडेट मिलते हैं।
भारत की पूर्व जियोस्टेशनरी संपत्तियां, INSAT‑3D series, मौसम निगरानी के लिए समर्पित थीं। EOS‑05 पहला सैटेलाइट है जो उस कक्षा स्लॉट में हाई‑रेज़ोल्यूशन इमेजिंग जोड़ता है।
The launch vehicle employed a Cryogenic stage — rocket propulsion system using liquid hydrogen and liquid oxygen, providing high thrust; failures affe