सारांश
ISRO ने 2026 के लॉन्च कैलेंडर के लिए निश्चित तिथियों की घोषणा न करने के बावजूद गगनयान परियोजना को आगे बढ़ाया है। अप्रैल 2026 में एजेंसी ने सतीश धवन स्पेस सेंटर में दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT‑02) किया। यह परीक्षण, चार चयनित भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के एक सप्ताह लंबे व्यवहार अध्ययन के साथ, मिशन तत्परता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम दर्शाता है।
मुख्य विकास (अप्रैल 2026)
- IADT‑02 का निष्पादन ~5.7 टन वजन वाले सिम्युलेटेड क्रू मॉड्यूल का उपयोग करके किया गया।
- मॉड्यूल को भारतीय वायु सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर द्वारा ~3 किमी की ऊँचाई तक उठाया गया और श्रीहरिकोटा तट के निकट निर्धारित समुद्री ड्रॉप ज़ोन के ऊपर छोड़ा गया।
- सफल रिलीज़ और रिकवरी ने आगामी G1 मिशन के लिए ड्रॉप‑मैकेनिज़्म की विश्वसनीयता की पुष्टि की।
- साथ ही, एक उच्च‑ऊँचाई सुविधा (~3,500 m समुद्र स्तर से) पर, चार भारतीय अंतरिक्ष यात्री, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और चिकित्सा स्टाफ के साथ, मानव कारकों का मूल्यांकन करने के लिए एक सप्ताह लंबा व्यवहार अध्ययन किया गया।
महत्वपूर्ण तथ्य
• सिम्युलेटेड क्रू मॉड्यूल का द्रव्यमान (5.7 टन) G1 मिशन के लिए नियोजित वास्तविक मॉड्यूल को प्रतिबिंबित करता है।
• ड्रॉप की ऊँचाई लगभग 3 किमी है।