समीक्षा
ISRO ने उन्नत पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट EOS‑05 को GSLV‑F17 का उपयोग करके 4 सितंबर 2026 को सब‑जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित किया।
मुख्य विकास
- लॉन्च समय: 02:55 a.m. से SDSC (दूसरा लॉन्च पैड)।
- पेलोड द्रव्यमान: 2,367 kg, अब तक GSLV द्वारा लॉन्च किया गया सबसे भारी सैटेलाइट।
- प्राप्त कक्षा: लिफ्ट‑ऑफ़ के 18 मिनट के भीतर सब‑जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (Sub‑GTO)।
- मिशन संख्या: GSLV की 19वीं उड़ान और श्रीहरिकोटा से 107वां लॉन्च।
- जियोसिंक्रोनस कक्षा से पहला इमेजिंग सैटेलाइट, निरंतर कवरेज प्रदान करता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
यह लॉन्च जनवरी 2026 में PSLV‑C62 विफलता और मई 2025 में पहले PSLV‑C61 झटके के बाद आठ‑महीने के अंतराल के बाद हुआ है। ISRO ने तकनीकी समस्याओं को हल करने के लिए निर्धारित मिशनों को रोक दिया था। सफल GSLV‑F17 मिशन अगस्त 2021 के GSLV‑F10 अनियमितता से भी उबरना दर्शाता है, जहाँ क्रायोजेनिक अपर स्टेज ने इग्निशन नहीं किया।
लॉन्च के बाद स्वास्थ्य जांच में सभी वाल्व कार्यरत, सोलर पैनल तैनात और कुल मिलाकर सैटेलाइट स्वास्थ्य “बिल्कुल ठीक” दिखाया गया। अगले चरणों में EOS‑05 को उसके अंतिम जियोस्टेशनरी स्लॉट में राष्ट्रीय अनुप्रयोगों के लिए स्थापित करने हेतु कक्षा‑उन्नयन संचालन शामिल हैं।
UPSC प्रासंगिकता
- रणनीतिक स्वायत्तता: विदेशी सहायता के बिना उच्च‑मूल्य इमेजिंग सैटेलाइट लॉन्च करने की भारत की क्षमता को दर्शाता है, जो “Atmanirbhar Bharat” दृष्टि के साथ संरेखित है।