समीक्षा
ISRO ने अगले‑पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 को 31 अक्टूबर 2026 को एक सटीक कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। लॉन्च में भारी‑उठान वाहन GSLV‑F18 का उपयोग किया गया और NavIC कंसटेलेशन को उसकी न्यूनतम परिचालन व्यवस्था चार सैटेलाइट्स की पुनर्स्थापित किया।
मुख्य विकास
- ISRO ने pyro valves को खुली स्थिति (तीन वाल्व) में उड़ाया ताकि वह सिग्नल‑हानि समस्या से बचा सके जो NVS‑02 को प्रभावित कर रही थी।
- कठोर कंपन और शॉक परीक्षण एक राष्ट्रीय‑स्तर की समिति द्वारा किए गए, जिसका अध्यक्ष पूर्व ISRO प्रमुख Kiran Kumar थे।
- कक्षा प्रवेश की सटीकता: परिजी 170.31 km (योजना 170.36 km) पर प्राप्त हुआ और एपोजी 38,080 km (योजना 37,247 km) पर।
- अब चार सैटेलाइट सक्रिय हैं: NVS‑01, NVS‑03, और दो अन्य; NVS‑04 और NVS‑05 के लॉन्च की योजना है।
- Real‑time tracking under the Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana अब 10,400 लोकोमोटिव और 64,000 मछली पकड़ने वाले जहाज़ों को कवर करती है, जिसका लक्ष्य छह महीने में 100,000 जहाज़ों का है।
- ISRO के FY‑2026‑27 मैनिफेस्ट में पाँच और लॉन्च शामिल हैं, पहला अनक्रूड Gaganyaa ...
