समीक्षा
दक्षिण-पश्चिमी मानसून के समाप्त होने के बाद, दोनों Karnataka और Andhra Pradesh ने गंभीर वर्षा कमी दर्ज की, जिससे बड़े पैमाने पर सूखा उत्पन्न हुआ। इस कमी ने प्रमुख फसलों को नुकसान पहुँचाया, राज्यों को केंद्रीय सहायता की मांग करने पर मजबूर किया, और सूखा‑प्रबंधन नीतियों में अंतर को उजागर किया।
मुख्य विकास
- Karnataka में जून‑सितंबर की वर्षा सामान्य से लगभग 35% कम थी; 240 में से 217 तालुकों को सूखा‑प्रभावित घोषित किया गया है।
- Andhra Pradesh ने जून‑अगस्त के लिए 53% कमी दर्ज की; 688 में से 388 मंडलों को सूखा अलर्ट में रखा गया है।
- Karnataka ने केंद्र से NDRF से ₹11,000 crore और उच्च इनपुट सब्सिडी की मांग की है।
- Andhra Pradesh ने बागवानी फसल संरक्षण के लिए ₹190 crore अलग रखे हैं और जल‑संरक्षण निर्देश जारी किए हैं।
- दोनों राज्य micro‑irrigation और कम जल‑उपयोग वाली फसलों को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन कोई बाध्यकारी सीमाएँ नहीं लगाई गई हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
राष्ट्रीय सूखा मूल्यांकन कृषि और जलविज्ञान संकेतकों को ग्राउंड‑ट्रुथिंग के साथ मिलाता है। केवल तब जब कोई राज्य इन मानदंडों को पूरा करता है, तब वह NDRF से अतिरिक्त सहायता प्राप्त कर सकता है। Inter‑Ministerial Central Team सहायता जारी होने से पहले निष्कर्षों की पुष्टि करने के लिए जिम्मेदार है।
वर्तमान मानसून 2015 के बाद से सबसे खराब रहा, और वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि मजबूत हो रहा El Niño इसका कारण हो सकता है, हालांकि विस्तृत कारण अध्ययन अभी लंबित है।
2009 से, Manual for Drought Management और Finance Commission के निर्णयों ने घोषणा प्रक्रिया को कड़ा किया है, जिससे अतिरंजित दावों में कमी आई है।
UPSC प्रासंगिकता
सूखा प्रतिक्रिया ढाँचा को समझना GS 2 (Polity) और GS 3 (Economy & Environment) के लिए आवश्यक है। उम्मीदवारों को ध्यान देना चाहिए:
- The role of the