Kasturirangan Report सुझाव देता है कि मानव गतिविधियाँ Western Ghats के बड़े हिस्से में जारी रह सकती हैं। हालांकि, Karnataka Assembly ने सर्वसम्मति से इसकी मुख्य सिफ़ारिशों के खिलाफ मतदान किया, डेटा की शुद्धता और आजीविका संबंधी चिंताओं को कारण बताते हुए।
मुख्य विकास
- Assembly ने रिपोर्ट में 2012 remote‑sensing डेटा के उपयोग को अस्वीकार किया।
- यदि किसी revenue village के ≥20% क्षेत्र संवेदनशील हो तो उसे ESA के रूप में लेबल करने का प्रस्ताव, कृषि भूमि और बस्तियों को कड़ी नियमन के अधीन ला सकता है।
- Centre के 2013‑14 निर्देश ने राज्यों से सिफ़ारिशों को ground‑truth करने को कहा, जिससे Karnataka में दो पक्षीय विरोध उत्पन्न हुआ।
- अन्य राज्यों में प्रगति दिख रही है: Gujarat समझौते के करीब, Tamil Nadu में कोई बड़ा विवाद नहीं, Kerala अपने ESA क्षेत्र को घटाने की कोशिश कर रहा है, Maharashtra और Goa गांवों को बाहर रखने की मांग कर रहे हैं।
- Centre के 2024 निर्णय ने ESAs को राज्य‑दर‑राज्य सूचित करने की अनुमति दी, जिससे Karnataka पर वैकल्पिक मानचित्र तैयार करने का दबाव बढ़ा।
महत्वपूर्ण तथ्य
Karnataka प्रस्तावित ESAs में क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा हिस्सा रखता है। Assembly का प्रस्ताव एक नया मानचित्र बनाने का कहता है, लेकिन राज्य को किसान और कामगारों की चिंताओं को अपने संरक्षण जिम्मेदारियों के साथ संतुलित करना होगा। ESAs को अंतिम रूप देने में देरी से व्यवसायों को अनुमत विकास के बारे में अनिश्चितता रहती है, जिससे निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ता है।
UPSC प्रासंगिकता
यह मुद्दा कई GS पेपरों को छूता है: GS3 – Environment (जैव विविधता हॉटस्पॉट्स का संरक्षण, ESA नीति), GS2 – Polity (केंद्र‑राज्य संबंध, विधायी प्रस्ताव), और GS4 – Ethics (विकास को पारिस्थितिक संरक्षण के साथ संतुलित करना)। Kasturirangan और Gadgil रिपोर्टों, ESA फ्रेमवर्क, और संघवाद की राजनीतिक गतिशीलता को समझना प्रीlims और mains दोनों में उत्तर लेखन के लिए आवश्यक है।
आगे का रास्ता
- Karnataka को पारदर्शी ground‑truthing करनी चाहिए और स्थानीय हितधारकों को शामिल करके सहमति बनानी चाहिए।
- राज्य कुछ समर्थन कर सकता है