Overview
हाल ही में पाँच जनजातीय पुरुषों की गिरफ्तारी Madhya Pradesh में हुई और Satpura Tiger Reserve के पास रेडियो‑कॉलर्ड बाघनी की लाश की खोज ने भारत के संरक्षण मॉडल पर बहस को फिर से ज्वलंत किया। यह घटना वन अधिकारियों, जनजातीय समुदायों और “fortress conservation” मानसिकता के बीच तनाव को उजागर करती है, जो अभी भी नीति कार्यान्वयन को आकार देती है।
Key Developments
- पाँच जनजातीय पुरुषों को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और प्लाकर्ड के साथ फ़ोटो खिंचा गया, जब उन्हें अपने पशुधन पर हमला करने वाले बाघ को ज़हर देने का आरोप लगा।
- रेडियो‑कॉलर्ड बाघनी की लाश 27 March 2026 को उजागर की गई, जो उसकी मृत्यु के एक महीने बाद थी।
- वर्ष 2025 में राज्य में 55 बाघ मौतें दर्ज की गईं – जो Project Tiger की शुरुआत के बाद से सबसे अधिक हैं, जिसमें 15 (27%) को अस्वाभाविक मौतें (ज़हर, शिकार, विद्युत् मार, सड़क/रेल दुर्घटनाएँ) के रूप में वर्गीकृत किया गया।
- पर्यावरण कार्यकर्ता Ajay Dubey ने एक PIL दायर किया, जिसमें वन अधिकारियों की लापरवाही का आरोप लगाया गया और बाघनी की मृत्यु को एक अफीम खेत से जोड़ा गया।
- राज्य अधिकारियों, जिसमें मुख्य वन्यजीव वार्डन Subharanjan Sen भी शामिल हैं, का कहना है कि हर बाघ की मृत्यु को प्रारंभ में शिकार माना जाता है जब तक कि अन्यथा सिद्ध न हो।
Important Facts
बाघनी की पोस्ट‑मार्टेम बिना वीडियो दस्तावेज़ीकरण के की गई, और फोरेंसिक जांच अधूरी रह गई। मौतों को अक्सर बिना गहन जांच के “क्षेत्रीय झड़प” के रूप में जल्दी से बताया जाता है। राज्य का हलफ़नामा वैधानिक सीमाओं को स्वीकार करता है जो संगठित वन्यजीव अपराध की जांच में बाधा डालती हैं, विशेषकर जब अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क शामिल हों।
Exam Relevance
- Understanding the interplay between Forest Rights Act (FRA) — 2006 legislation granting forest
