Overview
MoST और Birbal Sahni Institute of Palaeosciences (BSIP) के शोधकर्ताओं ने प्राचीन Gondwana वनों में लगभग 250 मिलियन वर्ष पहले फैले विशाल वनाग्नि के आणविक प्रमाणों की खोज की है। *Geological Journal* में प्रकाशित इस अध्ययन ने पैलिनोलॉजिकल‑आणविक एकीकृत दृष्टिकोण का उपयोग करके Permian अवधि के दौरान आग के नियमों को पुनर्निर्मित किया है।
Key Developments
- भारतीय Permian अवसादों में पहली बड़ी पैमाने की palaeofire संकेतों की पहचान की गई।
- आकारिकी और प्रकाशीय विशेषताओं का उपयोग करके उच्च‑तीव्रता (h‑PAL‑CH) और निम्न‑तीव्रता (l‑PAL‑CH) माइक्रोचारकोल कणों के बीच अंतर किया गया।
- उच्च‑रिज़ॉल्यूशन वाली आग पुनर्निर्माण के लिए palynofacies विश्लेषण को Raman spectroscopy और FTIR spectroscopy के साथ लागू किया गया।
- द्वितीय‑क्रम के Raman पीक और निदानात्मक FTIR कार्यात्मक समूहों का पता लगाया गया, जो दहन‑उत्पन्न पॉली‑ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs) की पुष्टि करते हैं।
Important Facts
शोध टीम—Neha Aggarwal, Shivalee Srivastava और Runcie Paul Mathews—ने Godavari Valley Coalfield के कोयला‑धारी सेडिमेंट्स की जांच की। सूक्ष्म अवलोकनों को आणविक संकेतों के साथ एकीकृत करके, उन्होंने केवल दृश्य पहचान पर पहले निर्भर रहने की समस्या को दूर किया, जो अक्सर चारकोल के मूल की अस्पष्ट व्याख्याओं की ओर ले जाता था।
OX‑CH (ऑक्सीडाइज़्ड अपारदर्शी फाइटोक्लास्ट) और PAL‑CH (आग‑प्रेरित अपारदर्शी फाइटोक्लास्ट) जैसे माइक्रोचारकोल प्रकारों को अलग किया गया, जिससे आग की तीव्रता और आवृत्ति की अधिक सूक्ष्म कालिक विभेदन संभव हुआ।
Exam Relevance
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