अवलोकन
एक वर्ष के वैज्ञानिक अध्ययन ने केरल और तमिलनाडु के तटों पर प्लास्टिक‑रेज़िन पेललेट, जिन्हें nurdles कहा जाता है, की लगातार मौजूदगी को दर्ज किया है, जो MSC ELSA‑3 के डूबने के बाद हुई। यह जहाज़ मई 2025 में डूबा, जिससे लगभग 640 कंटेनर रेजिन पेललेट, डीजल, फर्नेस तेल और अन्य खतरनाक सामग्री रिलीज़ हुई।
मुख्य विकास
- तट सर्वेक्षणों ने रिसाव के तुरंत बाद 31,230 पेललेट प्रति वर्ग मीटर की अधिकतम घनत्व दर्ज किया, जो तीन महीनों में >80 % घट गया, लेकिन अक्टूबर 2025 तक नए हॉटस्पॉट्स में फिर से उभरा।
- मई 2026 तक, पेललेट अभी भी समुद्र तट की तलछट में 20 सेमी तक दफ़न पाए गए, जो दीर्घकालिक स्थायित्व दर्शाते हैं।
- भौतिक और रासायनिक वृद्धिंगत को FTIR और स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का उपयोग करके देखा गया, जिसमें सतह का ऑक्सीकरण और पीलेपन दिखा।
- वेदित पेललेट ने भारी धातुएँ, PAHs, पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बन और PCBs को संचित किया, और घनी सूक्ष्मजीव समुदायों द्वारा उपनिवेशित हो गए, जिन्हें plastisphere कहा जाता है।
- वृद्ध पेललेट पर सूक्ष्मजीव भार 100,000–1,000,000 CFU प्रति ग्राम के बीच बढ़ गया, विशेष रूप से मानसून अवधि में।
- नमूना ली गई मछलियों में 1.08 % (2,413 में से 26) में पेललेट का सेवन दर्ज किया गया, जहाँ वेदित, प्रदूषक‑भरे पेललेट ने ऑक्सीडेटिव तनाव और ऊतक क्षति उत्पन्न की।
महत्वपूर्ण तथ्य
अध्ययन को TNPCB द्वारा आदेशित किया गया और SDMRI द्वारा किया गया। निष्कर्ष सहकर्मी‑समीक्षित जर्नल Marine Pollution में प्रकाशित हुए।