अवलोकन
भारत की गर्मियों की गर्मी एक बार‑बार आने वाली संकट बन गई है। NDMA नियमित रूप से तैयारियों के आंकड़े प्रकाशित करता है, जबकि 16th Finance Commission ने हीटवेव को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है। मौजूदा हीट एक्शन प्लान केवल उपचारात्मक कदमों तक सीमित हैं और उन लाखों लोगों के बढ़ते जोखिम को नहीं संबोधित करते जो असुरक्षित इनडोर तापमान में काम, यात्रा और नींद लेते हैं।
मुख्य विकास
- NDMA ने राज्यों में हीट एक्शन प्लान की असमान गुणवत्ता को स्वीकार किया है।
- 16th Finance Commission हीटवेव के लिए औपचारिक राष्ट्रीय आपदा स्थिति की सिफारिश करता है ताकि समर्पित केंद्रीय फंडिंग सक्षम हो सके।
- एक राष्ट्रीय कूलिंग डॉक्ट्रिन की मांग की गई है जो सुरक्षित इनडोर तापमान को सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकार के रूप में सुनिश्चित करे।
- फैक्ट्री, वेयरहाउस, कॉल सेंटर आदि के लिए अनिवार्य इनडोर कूलिंग मानक निर्धारित करने का प्रस्ताव।
महत्वपूर्ण तथ्य
- वर्तमान शमन अल्पकालिक समाधान पर निर्भर करता है: जल कियोस्क, सार्वजनिक सलाह, छायादार बस स्टॉप शेल्टर।
- प्रस्तावित तकनीकों में पैसिव कूलिंग सामग्री, परावर्तक छत, और जिला कूलिंग सिस्टम शामिल हैं।
- भारत का पावर ग्रिड इष्टतम दिनों में भी स्थापित क्षमता का अधिकतम 60% ही आपूर्ति कर सकता है, जिससे ऊर्जा‑गहन एयर‑कंडीशनिंग की व्यवहार्यता सीमित होती है।
- भारत में गर्मी अधिक लंबी, अधिक आर्द्र और अधिक गीली होती है, जबकि मौजूदा कूलिंग साहित्य में प्रमुख रूप से सूखे यूरोपीय गर्मियों का उल्लेख है।
UPSC प्रासंगिकता
यह लेख कई GS डोमेनों को छूता है। NDMA की भूमिका अंतर‑सरकारी...