अवलोकन
यह लेख दो क्लासिक UPSC मेन्स प्रश्नों के लिए एक संरचित विचार‑प्रक्रिया प्रदान करता है: (1) वे कारक जो Persian को उसके युग के ‘English’ की स्थिति तक पहुँचाए और भारतीय समाज पर उसका प्रभाव; और (2) Moderates और Extremists की वैकल्पिक विचारधारा, विधियाँ और उद्देश्य। इन विषयों को समझने से अभ्यर्थियों को सांस्कृतिक‑राजनीतिक विकास को GS‑1 पाठ्यक्रम की आवश्यकताओं से जोड़ने में मदद मिलती है।
मुख्य विकास
- Geopolitical corridors: पर्वतीय दरवाज़े और Indo‑Gangetic मैदान ने 11वीं सदी से Persian व्यापारियों, विद्वानों और कवियों के प्रवाह को सुगम बनाया।
- Dynastic patronage: Delhi Sultanate और बाद में Mughal Empire ने राजस्व, न्यायपालिका और दरबार के इतिहास में Persian को संस्थागत बनाया।
- Akbar’s reforms: 1582 में, Akbar ने Persian को साम्राज्य की आधिकारिक भाषा घोषित किया, जिससे Kayasthas और Khatris में Persian‑प्रशिक्षित लिपिकों का उदय हुआ।
- Literary flourishing: Firdausi जैसे कवियों और दरबारी कवियों ने एक जीवंत Persian साहित्यिक संस्कृति का निर्माण किया, जो धार्मिक विमर्श (जैसे Sikh शब्दावली) में घुली-मिली।
- British continuity: 1765 के बाद भी, East India Company ने Bengal, Bihar और Orissa की दरबार भाषा के रूप में Persian को बरकरार रखा, जिससे इसकी प्रशासनिक जड़ता स्पष्ट हुई।
- Moderate approach (c. 1885‑1905): संवैधानिक याचिकाओं, विधायी परिषदों में प्रतिनिधित्व और क्रमिक सुधारों पर जोर दिया, जो उदार British राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित था।
- Extremist surge (post‑1905): प्रेरित हुआ
