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Supreme Court ने 28 जनवरी 2026 के Home Ministry advisory पर पूर्ण ‘Vande Mataram’ प्ले के खिलाफ याचिका को खारिज किया

Supreme Court ने 28 जनवरी 2026 के Home Ministry advisory पर पूर्ण ‘Vande Mataram’ प्ले के खिलाफ याचिका को खारिज किया
Supreme Court ने उस 28 जनवरी 2026 के Home Ministry advisory को चुनौती देती याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राष्ट्रीय गान से पहले ‘Vande Mataram’ को पूर्ण रूप से बजाने का आदेश है। कोर्ट ने कहा कि यह परिपत्र गैर‑दंडात्मक है और व्यक्तिगत विवेक का सम्मान करता है। यह निर्णय मौलिक कर्तव्यों (Article 51A) और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संवैधानिक संतुलन को उजागर करता है, जो UPSC Polity के लिए एक प्रमुख विषय है।
Overview Supreme Court of India ने एक याचिका को खारिज किया, जिसमें 28 जनवरी 2026 के advisory circular को चुनौती दी गई थी, जो Ministry of Home Affairs द्वारा जारी किया गया था। इस परिपत्र में यह निर्देश दिया गया था कि National Song ‘Vande Mataram’ को सभी सार्वजनिक और समारोहिक अवसरों पर National Anthem से पहले पूर्ण रूप से बजाया जाए। Key Developments Chief Justice Surya Kant के नेतृत्व वाले बेंच ने कहा कि परिपत्र में कोई दंडात्मक प्रावधान या गैर‑अनुपालन के लिए कानूनी दंड नहीं है। Justice Joymalya Bagchi ने इस बात पर ज़ोर दिया कि advisory में शब्द “may” का प्रयोग किया गया है, जिससे संस्थाओं को यह तय करने की स्वतंत्रता मिलती है कि वे गा रहे हैं या नहीं, इस प्रकार individual conscience का सम्मान होता है। Senior advocate Sanjay Hegde ने तर्क दिया कि गीत को “अनिवार्य” बनाना सामाजिक रूप से निष्ठा का प्रदर्शन करने के लिए मजबूर करता है, जो personal liberty का उल्लंघन है। Solicitor General Tushar Mehta ने Article 51A और 42nd Constitutional Amendment का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान एक कर्तव्य है, न कि जबरन आदेश। याचिका को “असमय” कहा गया और आगे नहीं सुना गया। Important Facts • परिपत्र में National Anthem से पहले Vande Mataram का तीन‑मिनट का प्रस्तुतीकरण आदेशित किया गया है, जबकि National Anthem केवल 55‑सेकंड का है। • कोई दंडात्मक कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया गया है।
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Quick Reference

Key Insight

SC ने MHA सलाह को बरकरार रखा, Vande Mataram निर्देश की गैर‑दंडात्मक प्रकृति पर ज़ोर दिया

Key Facts

  1. Supreme Court ने 28 January 2026 की Home Ministry सलाह को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
  2. सलाह सभी सार्वजनिक और समारोहिक अवसरों पर राष्ट्रीय गान से पहले ‘Vande Mataram’ का पूर्ण गायन अनिवार्य करती है।
  3. सलाह में कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है; अनुपालन न करने पर कोई कानूनी दंड नहीं लगाया जाता।
  4. Bench का नेतृत्व Chief Justice Surya Kant ने किया; Justice Joymalya Bagchi ने “may” शब्द के प्रयोग को उजागर किया, जो विवेक प्रदान करता है।
  5. Solicitor General Tushar Mehta ने Article 51A (मौलिक कर्तव्य) और 42nd Constitutional Amendment का हवाला देते हुए दायित्व को बाध्यता से ऊपर रखने पर बल दिया।
  6. सलाह तीन मिनट के Vande Mataram को 55‑सेकंड के राष्ट्रीय गान के मुकाबले निर्धारित करती है।
  7. याचिका को “असमय” कहा गया और आगे नहीं सुना गया।

Background

यह मुद्दा संवैधानिक स्वतंत्रताओं (Article 19(1)(a) – अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करने के कर्तव्य (Article 51A) के संगम पर स्थित है। यह दर्शाता है कि Supreme Court सलाह और निर्देश में कैसे अंतर करती है और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को राज्य‑निर्धारित देशभक्तिपूर्ण व्यवहार के साथ कैसे संतुलित करती है, जो Polity और Ethics के पाठ्यक्रम में बार‑बार आने वाला विषय है।

UPSC Syllabus

  • GS2 — Constitutional posts, bodies and their powers and functions
  • Essay — Philosophy, Ethics and Human Values
  • Prelims_GS — Constitution and Political System
  • Prelims_GS — National Current Affairs
  • GS4 — Essence, determinants and consequences of Ethics in human actions

Mains Angle

GS 2 – Polity: SC के Vande Mataram सलाह के फैसले के संदर्भ में मौलिक कर्तव्यों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संवैधानिक संतुलन पर चर्चा करें। संभावित प्रश्न: “क्या Vande Mataram को अनिवार्य बनाना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, इसका मूल्यांकन करें।”

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Overview

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Full Article

Overview

Supreme Court of India ने एक याचिका को खारिज किया, जिसमें 28 जनवरी 2026 के advisory circular को चुनौती दी गई थी, जो Ministry of Home Affairs द्वारा जारी किया गया था। इस परिपत्र में यह निर्देश दिया गया था कि National Song ‘Vande Mataram’ को सभी सार्वजनिक और समारोहिक अवसरों पर National Anthem से पहले पूर्ण रूप से बजाया जाए।

Key Developments

  • Chief Justice Surya Kant के नेतृत्व वाले बेंच ने कहा कि परिपत्र में कोई दंडात्मक प्रावधान या गैर‑अनुपालन के लिए कानूनी दंड नहीं है।
  • Justice Joymalya Bagchi ने इस बात पर ज़ोर दिया कि advisory में शब्द “may” का प्रयोग किया गया है, जिससे संस्थाओं को यह तय करने की स्वतंत्रता मिलती है कि वे गा रहे हैं या नहीं, इस प्रकार individual conscience का सम्मान होता है।
  • Senior advocate Sanjay Hegde ने तर्क दिया कि गीत को “अनिवार्य” बनाना सामाजिक रूप से निष्ठा का प्रदर्शन करने के लिए मजबूर करता है, जो personal liberty का उल्लंघन है।
  • Solicitor General Tushar Mehta ने Article 51A और 42nd Constitutional Amendment का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान एक कर्तव्य है, न कि जबरन आदेश।
  • याचिका को “असमय” कहा गया और आगे नहीं सुना गया।

Important Facts

• परिपत्र में National Anthem से पहले Vande Mataram का तीन‑मिनट का प्रस्तुतीकरण आदेशित किया गया है, जबकि National Anthem केवल 55‑सेकंड का है।
• कोई दंडात्मक कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया गया है।

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SC ने MHA सलाह को बरकरार रखा, Vande Mataram निर्देश की गैर‑दंडात्मक प्रकृति पर ज़ोर दिया

Key Facts

  1. Supreme Court ने 28 January 2026 की Home Ministry सलाह को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
  2. सलाह सभी सार्वजनिक और समारोहिक अवसरों पर राष्ट्रीय गान से पहले ‘Vande Mataram’ का पूर्ण गायन अनिवार्य करती है।
  3. सलाह में कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है; अनुपालन न करने पर कोई कानूनी दंड नहीं लगाया जाता।
  4. Bench का नेतृत्व Chief Justice Surya Kant ने किया; Justice Joymalya Bagchi ने “may” शब्द के प्रयोग को उजागर किया, जो विवेक प्रदान करता है।
  5. Solicitor General Tushar Mehta ने Article 51A (मौलिक कर्तव्य) और 42nd Constitutional Amendment का हवाला देते हुए दायित्व को बाध्यता से ऊपर रखने पर बल दिया।
  6. सलाह तीन मिनट के Vande Mataram को 55‑सेकंड के राष्ट्रीय गान के मुकाबले निर्धारित करती है।
  7. याचिका को “असमय” कहा गया और आगे नहीं सुना गया।

Background & Context

यह मुद्दा संवैधानिक स्वतंत्रताओं (Article 19(1)(a) – अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करने के कर्तव्य (Article 51A) के संगम पर स्थित है। यह दर्शाता है कि Supreme Court सलाह और निर्देश में कैसे अंतर करती है और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को राज्य‑निर्धारित देशभक्तिपूर्ण व्यवहार के साथ कैसे संतुलित करती है, जो Polity और Ethics के पाठ्यक्रम में बार‑बार आने वाला विषय है।

UPSC Syllabus Connections

GS2•Constitutional posts, bodies and their powers and functionsEssay•Philosophy, Ethics and Human ValuesPrelims_GS•Constitution and Political SystemPrelims_GS•National Current AffairsGS4•Essence, determinants and consequences of Ethics in human actions

Mains Answer Angle

GS 2 – Polity: SC के Vande Mataram सलाह के फैसले के संदर्भ में मौलिक कर्तव्यों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संवैधानिक संतुलन पर चर्चा करें। संभावित प्रश्न: “क्या Vande Mataram को अनिवार्य बनाना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, इसका मूल्यांकन करें।”

Analysis

Practice Questions

GS1
Easy
Prelims MCQ

वर्तमान मामलों – राष्ट्रीय प्रतीकों के संवैधानिक प्रभाव

1 marks
4 keywords
GS2
Medium
Mains Short Answer

संवैधानिक कानून – अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम मौलिक कर्तव्य

5 marks
5 keywords
GS2
Hard
Mains Essay

दर्शन, नैतिकता और मानव मूल्यों – राष्ट्रीय प्रतीकों में कर्तव्य बनाम स्वतंत्रता

20 marks
6 keywords
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