अवलोकन
Supreme Court 31 August 2026 को एक याचिका पर विचार करेगा जिसमें हर पेट्रोल पंप पर इथेनॉल सामग्री का अनिवार्य, समान लेबलिंग की मांग की गई है। इस याचिका में इथेनॉल‑ब्लेंडेड ईंधनों, विशेष रूप से E20 मिश्रण, के लिए सार्वजनिक, वाहन‑वार अनुकूलता डेटाबेस की भी माँग की गई है।
मुख्य विकास
- Narendra Kumar Goswami द्वारा दायर याचिका में केंद्र से हर डिस्पेंसिंग नोजल और ईंधन चालान पर सटीक इथेनॉल प्रतिशत का लेबल लगाने का निर्देश देने की माँग की गई है।
- जज M.M. Sundresh और Prasanna B. Varale के साथ बनी बेंच इस मामले को सुनेंगे।
- निर्माता, मॉडल, इंजन प्रकार और वर्ष को शामिल करने वाला आधिकारिक, खोज योग्य vehicle‑compatibility database की माँग की गई है।
- E20 के मौजूदा फ़्लीट पर वास्तविक प्रभावों का अध्ययन करने के लिए एक independent expert committee स्थापित करने का प्रस्ताव।
- Central Consumer Protection Authority (CCPA) और Bureau of Indian Standards (BIS) के साथ तैयार किए गए राष्ट्रीय consumer‑disclosure protocol की माँग।
महत्वपूर्ण तथ्य
याचिका में कई विशिष्ट आवश्यकताओं का विवरण दिया गया है:
- हर ईंधन चालान में बेचे गए पेट्रोल में इथेनॉल प्रतिशत स्पष्ट रूप से दर्शाया जाना चाहिए।
- विशेषज्ञ समिति को ईंधन दक्षता, इंजन दीर्घायु, रखरखाव लागत, वारंटी प्रभाव, पर्यावरणीय पदचिह्न (जिसमें टेल‑पाइप उत्सर्जन और जल उपयोग शामिल है) और इथेनॉल उत्पादन से जुड़ी खाद्य‑सुरक्षा चिंताओं पर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए।
- प्राधिकरणों को सभी नीति फ़ाइलें, तकनीकी अध्ययन, अनुकूलता रिपोर्ट, सुरक्षा मानक, उपभोक्ता सलाह और सार्वजनिक परामर्श के रिकॉर्ड कोर्ट को प्रस्तुत करने होंगे।
- पुरानी और गैर‑अनुकूल वाहनों के लिए एक पारदर्शी संक्रमण ढांचा तैयार किया जाना चाहिए, जहाँ E20 संभव न हो, वहाँ कम‑इथेनॉल पेट्रोल की अनुमति दी जा सकती है।
UPSC प्रासंगिकता
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