Supreme Court West Bengal पर Enforcement Directorate की याचिका की जांच करता है
The ED ने Supreme Court से 23 April 2026 को संपर्क किया, CBI जांच की मांग करते हुए, जिसमें आरोप है कि Chief Minister Mamata Banerjee और राज्य पुलिस ने I‑PAC के कार्यालय पर छापेमारी के दौरान बाधा डाली। यह याचिका Article 32 के तहत दायर की गई है।
मुख्य विकास
- Solicitor General ने स्पष्ट किया कि ED कुल “breakdown of constitutional machinery” का आरोप नहीं लगा रहा है, बल्कि I‑PAC मामले में rule of law का उल्लंघन कर रहा है।
- Justices Prashant Kumar Mishra और N.V. Anjaria ने चेतावनी दी कि स्थिति को “breakdown” कहने से Article 356 और President’s Rule सक्रिय हो सकता है।
- SG ने पिछले घटनाओं का उल्लेख किया: 2019 में Kolkata Police Commissioner की पूछताछ, 2021 में Narada गिरफ्तारी, और हाल ही में Malda में एक भीड़ द्वारा न्यायिक अधिकारियों को घेरना, ताकि कार्यकारी हस्तक्षेप का पैटर्न दिखाया जा सके।
- ED का तर्क है कि क्योंकि राज्य पुलिस ने उसके खिलाफ FIR दर्ज की है, एजेंसी समान पुलिस से स्वतंत्र जांच के लिए संपर्क नहीं कर सकती; इसलिए एक तटस्थ केंद्रीय एजेंसी की आवश्यकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
1. याचिका (Case No. W.P.(Crl.) No. 16/2026) में CM, DGP, पुलिस कमिश्नर और अन्य अधिकारियों द्वारा कथित बाधा की CBI जांच की मांग की गई है।
2. Supreme Court ने West Bengal में “extra‑ordinary situation” देखी, यह नोट किया कि Chief Minister की ED छापेमारी में सीधी हस्तक्षेप साधारण Union‑State विवाद से अधिक है।
3. SG ने जोर दिया कि बाधा सार्वजनिक हित को नुकसान पहुंचाती है, जिससे ED सार्वजनिक पक्ष में व्रिट दायर कर सकता है।
UPSC प्रासंगिकता
इस मामले को समझने से उम्मीदवारों को कई संवैधानिक और प्रशासनिक अवधारणाओं को समझने में मदद मिलती है:
- Article 32 — Supreme Court को मूल अधिकारों की सुरक्षा के लिए व्रिट जारी करने की अनुमति देता है, एक मुख्य आधार
