Supreme Court ने CBI को दलित महिला की मृत्यु की प्रारंभिक जांच का निर्देश दिया
Supreme Court ने 11 March 2026 को CBI को मध्य प्रदेश की 20‑वर्षीय दलित महिला की मृत्यु के आसपास की परिस्थितियों की प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया। बेंच, जिसमें Justice M.M. Sundresh और Justice N. Kotiswar Singh शामिल हैं, ने स्पष्ट किया कि कोर्ट की भूमिका केवल यह तय करने तक सीमित है कि FIR दर्ज की जानी चाहिए या नहीं और कौन सी एजेंसी जांच करेगी।
Key Developments
- Court ने CBI की प्रारंभिक जांच का आदेश दिया और तीन महीने के भीतर FIR पंजीकरण पर निर्णय अनिवार्य किया।
- सीनियर एडवोकेट Colin Gonsalves और Meenakshi Arora ने कथित पुलिस निष्क्रियता, कई हत्याओं और संभावित राजनीतिक हस्तक्षेप को उजागर किया।
- राज्य के Additional Solicitor General SV Raju ने तर्क दिया कि यह घटना एक दुर्घटना थी और बिना किसी काबिल‑अपराध के FIR दर्ज नहीं की जा सकती।
- Court ने मेरिट पर टिप्पणी करने से परहेज किया, केवल प्रक्रियात्मक शुद्धता पर ध्यान केंद्रित किया।
Important Facts
1. Background of the case: पीड़िता पर 2019 में 15 वर्ष की आयु में उत्पीड़न का आरोप था। Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 की कोई धारा लागू नहीं की गई। उसके भाई और चाचा, मुख्य गवाह, बाद में मार दिए गए।
2. Legal procedural trigger: Supreme Court ने पहले, 22 January 2025 को, W.P.(Crl.) No. 41/2025 (Badi Bahu v. State of Madhya Pradesh) में नोटिस जारी किया था, जिसमें CBI या SIT जांच की मांग की गई थी, क्योंकि हत्याओं का "checkered history" और कथित राजनीतिक प्रभाव का उल्लेख किया गया था।
3. Section 174 of CrPC: Court ने Section 174 of CrPC के तहत दर्ज किए गए बयानों को नोट किया — संदेहास्पद मौतों की जांच की प्रक्रिया, जिसमें पुलिस को बयानों को रिकॉर्ड करना और रिपोर्ट तैयार करना आवश्यक है।