अवलोकन
2019 में, Madras High Court के आदेश के बाद, Tamil Nadu सरकार ने एक गजेट आदेश जारी किया जिसमें इंटरसेक्स बच्चों के लिए गैर‑जीवन‑धमकी वाली sex‑reassignment surgery पर प्रतिबंध लगाया गया। इस प्रतिबंध के तहत यह तय करने के लिए एक बहु‑विषयक पैनल की आवश्यकता होती है कि कोई सर्जरी चिकित्सकीय रूप से आवश्यक है या नहीं। विशेषज्ञ अब तर्क देते हैं कि राज्य को DSD मामलों के निदान और प्रबंधन को सुधारने के लिए अपनी जीनैटिक टेस्टिंग सुविधाओं को भी मजबूत करना चाहिए।
मुख्य विकास
- 2019: Gazette order जननांग‑सामान्यीकरण सर्जरी पर प्रतिबंध लगाता है जब तक कि वह जीवन‑धमकी न हो।
- पैनल की संरचना: बाल रोग सर्जन/यूरोलॉजिस्ट, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, सामाजिक कार्यकर्ता/मनोवैज्ञानिक/इंटरसेक्स कार्यकर्ता, और एक सरकारी प्रतिनिधि।
- 38 मेडिकल कॉलेजों में से केवल एक (Institute of Child Health, Egmore) में समर्पित जीनैटिक्स विभाग है।
- आउटसोर्स्ड जीनैटिक टेस्ट की वर्तमान लागत: कैरियोटाइपिंग के लिए ₹1,500‑₹2,500; उन्नत पैनलों के लिए ₹8,000‑₹10,000।
महत्वपूर्ण तथ्य
Tamil Nadu के अस्पतालों में लगभग प्रति माह एक से दो इंटरसेक्स केस देखे जाते हैं। सर्जिकल हस्तक्षेप केवल आपात स्थितियों तक सीमित है जैसे कुछ प्रकार का CAH। विशेषज्ञ दो प्रमुख अंतरालों को उजागर करते हैं:
- Karyotyping अधिकांश सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है और इसे आउटसोर्स करना पड़ता है।
- NGS जैसी उन्नत परीक्षण अनुपलब्ध हैं, जिससे सटीक उपप्रकार पहचान सीमित हो जाती है। (डेटा‑डिफिनिशन: NGS)
इन‑हाउस सुविधाओं के अभाव में, परिवारों को उच्च आउट‑ऑफ़‑पॉकेट लागत वहन करनी पड़ती है, और चिकित्सकों के पास कैंसर जोखिम, प्रजनन क्षमता और लिंग पहचान पर परामर्श के लिए समय पर डेटा नहीं होता।
UPSC प्रासंगिकता
यह मुद्दा mu को छूता है