समीक्षा
Tribal Affairs Ministry ने 31 August 2026 को एक कार्यालय मेमो जारी किया जिसमें कहा गया कि Forest Rights Act (FRA) में गैर‑वन उपयोग के लिए वन भूमि को मोड़ने से पहले Gram Sabha की सहमति प्राप्त करने का कोई प्रावधान नहीं है। इस बयान को तुरंत Campaign for Survival and Dignity (CSD) ने चुनौती दी, जो आदिवासी और वन‑निवासी संगठनों का राष्ट्रीय मंच है।
मुख्य विकास
- CSD ने मेमो को “तथ्यात्मक और कानूनी रूप से अस्थिर” कहा और उसकी वापसी की मांग की।
- पूर्व पर्यावरण मंत्री Jairam Ramesh ने मंत्रालय के रुख को मौजूदा निर्देशों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्वनिर्णयों जैसे Niyamgiri case से “शॉकिंग” विचलन कहा।
- एक संसद समिति, Power Ministry के NHPC के इनपुट के साथ, ने बताया कि 100% Gram Sabha सहमति की आवश्यकता बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए “महत्वपूर्ण बाधा” बन गई है।
- CSD ने इस बाधा के दावे को खारिज किया, यह बताते हुए कि लगभग 3,05,945.38 hectares वन भूमि को 2008‑09 और 2022‑23 के बीच Forest (Conservation) Act के तहत गैर‑वन उपयोग के लिए मंजूरी दी गई थी, बिना FRA के पूर्ण अनुपालन के।
- मंत्रालय का दृष्टिकोण प्रोजेक्ट डेवलपर्स, ठेकेदारों और बड़े निगमों को संतुष्ट करने के प्रयास के रूप में दर्शाया गया है, जो tribal अधिकारों को कमजोर करता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
Gram Sabha की सहमति अनिवार्य होने की कानूनी स्थिति लगभग दो दशकों से स्थापित है। वर्तमान मेमो इस आवश्यकता को पूरी तरह समाप्त करने का प्रयास करता है, न कि संसद समिति द्वारा सुझाए गए 100% सीमा को केवल घटाने का। CSD चेतावनी देता है कि ऐसा कदम FRA का गंभीर उल्लंघन होगा, जो NDA‑नेतृत्व वाले केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा तेज़ी से भूमि मोड़ने के बीच वन‑निवासियों के जीवनयापन को और कमजोर करेगा।