महिला‑नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स ने 1 लाख की सीमा हासिल की, DPIIT ने 2.12 लाख इकाइयों को मान्यता दी – प्रमुख योजनाएँ और फंडिंग मुख्य बिंदु
31 जनवरी 2026 तक, DPIIT ने 2.12 लाख स्टार्टअप्स को मान्यता दी है, जिनमें से एक लाख से अधिक में कम से कम एक महिला निदेशक/सहयोगी है, जो Startup India पहल और FFS, SISFS, तथा CGSS जैसी योजनाओं के प्रभाव को उजागर करता है, जो महिलाओं‑नेतृत्व वाले उद्यमों को अरबों रुपये प्रदान करती हैं। यह डेटा UPSC अभ्यर्थियों के लिए समावेशी उद्यमिता और सरकारी वित्तीय तंत्र का अध्ययन करने हेतु महत्वपूर्ण है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने घोषणा की कि, 31 जनवरी 2026 तक, **1 लाख से अधिक स्टार्टअप्स** में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार है, जो **2,12,283** इकाइयों में DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। यह मील का पत्थर सरकार की Startup India के तहत लैंगिक‑समावेशी उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा को दर्शाता है। मुख्य विकास कुल मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से, **1,02,054** में कम से कम एक महिला निदेशक/सहयोगी है। **6,789** बंद (विलुप्त/हटाए गए) स्टार्टअप्स में से, **2,950** महिला‑नेतृत्व वाले थे। FFS ने चयनित स्टार्टअप्स में **₹25,859 करोड़** का निवेश सुगम किया है, जिसमें **₹2,995 करोड़** 2020 से महिला‑नेतृत्व वाले उद्यमों को निर्देशित किए गए हैं। SISFS ने **₹592 करोड़** की फंडिंग स्वीकृत की, जिसमें से **₹294 करोड़** महिला‑नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को गई। CGSS ने **₹925 करोड़** मूल्य के ऋणों की गारंटी दी, जिसमें **₹39 करोड़** महिला‑नेतृत्व वाली फर्मों के लिए है। महत्वपूर्ण तथ्य एवं आँकड़े • कुल मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स (DPIIT): **2,12,283**। • महिला‑नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स (सक्रिय + बंद): **1,04,?** (1,02,054 सक्रिय + 2,950 बंद)। • बंद स्टार्टअप्स: **6,789** (2,950 महिला‑नेतृत्व वाले)। • फंडिंग चैनल: FFS के तहत AIFs, SISFS के तहत इनक्यूबेटर, और CGSS के तहत ऋण गारंटी। UPSC प्रासंगिकता भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के पैमाने और लैंगिक संरचना को समझना उद्यमिता, MSME नीति, और समावेशी विकास पर GS‑3 (अर्थव्यवस्था एवं विकास) प्रश्नों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। डेटा प्रमुख योजनाओं जैसे SIDBI‑चलित Fund of
Quick Reference
Key Insight
महिला‑नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स का 1‑लाख का आंकड़ा पार करना Startup India के तहत लिंग‑समावेशी विकास का संकेत देता है।
Key Facts
- DPIIT ने 31 जनवरी 2026 तक भारत में 2,12,283 स्टार्टअप्स को मान्यता दी।
- 1,02,054 स्टार्टअप्स (≈48%) में कम से कम एक महिला निदेशक/सहयोगी है।
- महिला‑नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स ने 2020 से Fund of Funds for Startups (FFS) के माध्यम से ₹2,995 करोड़ प्राप्त किए हैं।
- Startup India Seed Fund Scheme (SISFS) ने ₹592 करोड़ स्वीकृत किए, जिनमें से ₹294 करोड़ महिला‑नेतृत्व वाली कंपनियों के लिए earmarked हैं।
- Credit Guarantee Scheme for Startups (CGSS) ने ₹925 करोड़ के ऋणों की गारंटी दी; जिसमें ₹39 करोड़ महिला‑नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को गए।
- 6,789 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को बंद के रूप में सूचीबद्ध किया गया है; उनमें से 2,950 में कम से कम एक महिला निदेशक/सहयोगी था।
- जनवरी 2026 तक योजना‑वार चयन: FFS – 1,382 स्टार्टअप्स (17 बंद); SISFS – 3,311 (26 बंद); CGSS – 281 (1 बंद)।
Background
Startup India, जो 2016 में लॉन्च हुआ, वित्तीय उपकरणों जैसे FFS, SISFS और CGSS के माध्यम से नवाचार के लिए एक सहायक पारिस्थितिकी तंत्र बनाता है। महिला‑नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स में वृद्धि सरकार की लिंग‑समावेशी उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल को दर्शाती है, जो UPSC पाठ्यक्रम में समावेशी विकास, कॉरपोरेट गवर्नेंस और MSME विकास जैसे विषयों से जुड़ी है।
UPSC Syllabus
- GS2 — Functions and responsibilities of Union and States
- Prelims_GS — Physical Geography of India
- Essay — Economy, Development and Inequality
- GS1 — Post-independence consolidation and reorganization within the country
Mains Angle
GS Paper III (Economic Development) – लक्षित वित्तीय योजनाओं का लिंग‑समावेशी उद्यमिता पर प्रभाव का विश्लेषण करें; GS Paper IV (Ethics & Integrity) – चर्चा करें कि महिला निदेशकों को बढ़ावा देना सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को कैसे आगे बढ़ाता है।