अवलोकन
PLOS One में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन भारत के शहरी स्लम और गैर‑स्लम शहरी क्षेत्रों के बीच विशिष्ट स्तनपान में स्पष्ट अंतर को उजागर करता है। जबकि गैर‑स्लम पड़ोस में 55.8% शिशु विशिष्ट स्तनपान प्राप्त करते हैं, स्लम बस्तियों में यह आंकड़ा 50.1% तक गिर जाता है, जहाँ लगभग 65.49 मिलियन लोग रहते हैं।
मुख्य विकास
- शहरी स्लम में गैर‑स्लम शहरी क्षेत्रों की तुलना में विशिष्ट स्तनपान दर 5.7‑प्रतिशत‑अंक कम रिपोर्ट की गई है।
- अध्ययन अपर्याप्त स्तनपान को दस्त, संक्रमण, बौद्धिक और मोटर विकास में बाधा, और दीर्घकालिक रोगों के प्रति बढ़ी हुई संवेदनशीलता के उच्च जोखिम से जोड़ता है।
- लेखकों ने अंतर को पाटने के लिए स्लम समूहों में त्वरित, लक्षित हस्तक्षेपों की मांग की है।
महत्वपूर्ण तथ्य
शोध यह रेखांकित करता है कि भारत के शहरी स्लम में सभी शिशुओं में से आधे को WHO द्वारा अनुशंसित छह महीने का विशिष्ट स्तनपान नहीं मिल रहा है। यह कमी बाल रोग और मृत्यु दर को कम करने में प्रारंभिक पोषण की भूमिका को देखते हुए महत्वपूर्ण है। यह अंतर शहरी स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे, मातृ शिक्षा और स्तनपान समर्थन तक पहुँच में व्यापक चुनौतियों को दर्शाता है।
UPSC प्रासंगिकता
इस मुद्दे को समझना कई UPSC आयामों के लिए महत्वपूर्ण है:
- GS 3 – स्वास्थ्य और परिवार कल्याण: विशिष्ट स्तनपान मातृ‑शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों का एक प्रमुख संकेतक है और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उद्देश्यों के साथ संरेखित है।
- GS 4 – सामाजिक न्याय: स्लम और गैर‑स्लम क्षेत्रों के बीच अंतर सेवा वितरण में असमानताओं को उजागर करता है, जो समावेशी विकास के लक्ष्य रखने वाले नीति निर्माताओं के लिए मुख्य चिंता है।
- GS 2 – शासन: प्रभावी हस्तक्षेपों को लागू करने के लिए नगरपालिका निकायों, स्वास्थ्य विभागों और सामुदायिक संगठनों के बीच समन्वय आवश्यक है।
आगे का रास्ता
नीति निर्माताओं को एक बहु‑आयामी रणनीति पर विचार करना चाहिए:
- सुदृढ़ करें Urban slums
