2 March 2026 को, Boisar (Palghar district, Maharashtra) में एक रासायनिक इकाई में oleum का नया रिसाव हुआ, जिससे एक मोटी सफ़ेद धुंध उत्पन्न हुई, जो Tarapur‑Boisar industrial belt में लगातार सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करती है। इस घटना ने भारत की कानूनी और संस्थागत सुरक्षा उपायों की पर्याप्तता पर बड़े पैमाने पर रासायनिक आपदाओं के खिलाफ बहस को फिर से जीवित किया।
Key Developments
- ओलेयुम हवा के साथ प्रतिक्रिया करता है, सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य सल्फर ऑक्साइड्स छोड़ता है, जिससे एक घना बादल बनता है जो बचाव दलों की दृश्यता को बाधित करता है।
- टारापुर और बोइसर मिलकर रासायनिक, फार्मास्यूटिकल और संबंधित इकाइयों की उच्च सांद्रता को समेटे हुए हैं, जिससे आकस्मिक रिसाव की संभावना बढ़ती है।
- इसी तरह की घटनाएँ भी हुई हैं, जैसे कि विरार में एक दूध संयंत्र में अमोनिया रिसाव और मुंबई‑पुणे एक्सप्रेसवे पर प्रोपलीन टैंकर का रिसाव।
Regulatory Framework for Chemical Disasters
- NDMA ने रासायनिक आपदा की तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए बहु‑क्षेत्रीय दिशानिर्देश जारी किए हैं।
- MoEFCC इन दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन की देखरेख करता है और रोकथाम उपाय शुरू करता है।
- Environment Protection Act, 1986 आगे के नियमों के लिए वैधानिक आधार प्रदान करता है।
- EPA के तहत, MSIHC Rules, 1989 और Chemical Accident Rules, 1996 लागू किए गए।
- यह Public Liability Insurance Act, 1991 – legislation t
