The Ministry of Defence (MoD) ने अपने Sitapur, Uttar Pradesh में अप्रयुक्त भूमि पर 250 MW सौर ऊर्जा प्लांट को बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) के साथ मंजूर किया। यह defence land पर इस प्रकार का पहला प्रोजेक्ट है और ऊर्जा सुरक्षा तथा पर्यावरणीय स्थिरता के लिए एक नई दिशा का संकेत देता है।
मुख्य विकास
- Defence Minister Rajnath Singh द्वारा Sitapur Solar Project को मंजूरी।
- सौर‑प्लस‑स्टोरेज क्षमता को सक्षम करने के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) का एकीकरण।
- MoD (Army) के Integrated HQ और DGDE के समन्वय में कार्यान्वयन।
- defence establishments के लिए ग्रिड बिजली की खरीद लागत में कमी की संभावना, जिससे दीर्घकालिक कोष की बचत होगी।
- 1 June 2026 से शुरू होने वाले Domestic Solar Cell Mandate के साथ संरेखण।
ऊर्जा भंडारण पर महत्वपूर्ण तथ्य
ऊर्जा भंडारण अतिरिक्त नवीकरणीय शक्ति को पकड़ता है और जब मांग उत्पादन से अधिक हो जाती है तो उसे जारी करता है। दो सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली तकनीकें हैं:
- Pumped Hydro Storage (PHS): पानी को उच्च जलाशय में पंप किया जाता है और बाद में टरबाइन के माध्यम से जारी करके बिजली उत्पन्न की जाती है।
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS), विशेष रूप से Lithium Iron Phosphate (LFP) बैटरियों का उपयोग करने वाले, छोटे‑अवधि स्टोरेज के लिए, सौर‑प्लस‑स्टोरेज क्षमता को सक्षम करते हैं।