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India में बढ़ती डिजिटल सेंसरशिप: 2014 के बाद ब्लॉक किए गए खातों में वृद्धि और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरा

2014 से, India ने सोशल मीडिया खातों और URLs के ब्लॉकिंग में तेज़ वृद्धि देखी है, जो 2021 तक 470 से बढ़कर 9,800 हो गई, अक्सर सरकार के आलोचकों को लक्षित करती है। Section 69A और अस्पष्ट प्रक्रियात्मक नियमों के बढ़ते उपयोग से प्रक्रियात्मक सुरक्षा कमज़ोर हो रही है, डिजिटल निर्वासन और अधिनायकवादी प्रवृत्ति की चिंता बढ़ा रही है, जो शासन और मौलिक अधिकारों का अध्ययन करने वाले UPSC अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
पिछले दशक में, India की डिजिटल गवर्नेंस ने कभी‑कभी सामग्री हटाने से सोशल मीडिया पर विरोधी आवाज़ों की व्यवस्थित सेंसरशिप की ओर बदलाव किया है। स्वतंत्र कार्यकर्ता और पत्रकारों ने बताया कि Union सरकार की West‑Asia नीति और LPG संकट की आलोचना करने वाले खातों को ब्लॉक किया गया है, जो ऑनलाइन सार्वजनिक क्षेत्र पर राज्य‑प्रेरित नियंत्रण की व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है। मुख्य विकास (2021‑2026) 2014 से 2021 तक, ब्लॉक किए गए URLs, पोस्ट और खाते 470 से बढ़कर 9,800 हो गए। 2020‑21 के किसान विरोधों के दौरान, कई खातों को ब्लॉक किया गया; अंतरराष्ट्रीय दबाव ने सरकार को कुछ को पुनर्स्थापित करने पर मजबूर किया, जिससे संभावित सेंसरशिप के पैमाने का पता चला। 2023 में, सरकार ने IT Rules के तहत आपातकालीन शक्ति का प्रयोग करके BBC डॉक्यूमेंट्री के लिंक को ब्लॉक किया, जिससे “सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा” की परिभाषा का विस्तार हुआ। Karnataka हाई कोर्ट (2021‑22) ने Twitter (अब X) की ब्लॉकिंग आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया और जुर्माना लगाया, जिससे राज्य की सेंसरशिप स्थिति की न्यायिक स्वीकृति का संकेत मिला। ब्लॉकिंग शक्तियों को कई मंत्रालयों में विकेंद्रीकृत करने के प्रस्ताव ऐसे शासन को जन्म दे सकते हैं जहाँ कोई भी विभाग विशेषज्ञ निगरानी के बिना आलोचकों को चुप करा सके। महत्वपूर्ण कानूनी और प्रक्रियात्मक तथ्य Supreme Court के Shreya Singhal मामले ने प्रक्रियात्मक सुरक्षा के आधार पर Section 69A की पुष्टि की। व्यवहार में, सरकार Rule 16 का उपयोग करके आदेशों को गुप्त रखती है, जिससे प्रभावित उपयोगकर्ताओं को अदालत में उनका विरोध करने का अवसर नहीं मिलता। IT Rules 2009 के तहत बनाया गया ब्लॉकिंग कमेटी पूरी तरह से कार्यकारी है, जो अनुपातिकता के सिद्धांत और सुनवाई के अधिकार को कमजोर करता है। पूरे‑खाते पर प्रतिबंध t के बराबर हैं।
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Quick Reference

Key Insight

डिजिटल सेंसरशिप में वृद्धि स्वतंत्र भाषण को खतरे में डालती है, भारत के संवैधानिक संतुलन की परीक्षा लेती है

Key Facts

  1. ब्लॉक किए गए URLs, पोस्ट और अकाउंट्स 2014 में 470 से बढ़कर 2021 तक 9,800 हो गए।
  2. 2020‑21 के किसान विरोधों के दौरान, कई प्रो‑फार्मर अकाउंट्स को ब्लॉक किया गया; कुछ को बाद में अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद पुनर्स्थापित किया गया।
  3. 2023 में सरकार ने BBC डॉक्यूमेंट्री को ब्लॉक करने के लिए IT Rules 2009 का उपयोग किया, जिससे ‘सार्वजनिक व्यवस्था के खतरे’ की परिभाषा को विस्तृत किया गया।
  4. कर्नाटक हाई कोर्ट (2021‑22) ने ट्विटर की ब्लॉक आदेशों के खिलाफ याचिका को खारिज किया और जुर्माना लगाया, राज्य की स्थिति का समर्थन किया।
  5. Shreya Singhal v. Union of India (2015) ने IT एक्ट के सेक्शन 69A की संवैधानिकता को प्रक्रियात्मक सुरक्षा के साथ बरकरार रखा।
  6. 2009 ब्लॉकिंग नियमों का Rule 16 सरकार को ब्लॉक आदेशों को गोपनीय रखने की अनुमति देता है, जिससे न्यायिक समीक्षा सीमित होती है।
  7. ब्लॉकिंग शक्तियों को विकेंद्रीकृत करने के प्रस्ताव किसी भी मंत्रालय को विशेष निगरानी के बिना सामग्री को ब्लॉक करने की अनुमति दे सकते हैं।

Background

डिजिटल सेंसरशिप में वृद्धि सेक्शन 69A के तहत राज्य सुरक्षा शक्तियों और मौलिक अधिकार स्वतंत्र भाषण (आर्टिकल 19(1)(a)) के बीच टकराव को दर्शाती है। यह पारदर्शिता, जवाबदेही और शक्ति पृथक्करण से संबंधित शासन संबंधी चिंताएँ उठाती है, जो पॉलिटी, एथिक्स और डिजिटल इंडिया थीम्स को जोड़ती है।

UPSC Syllabus

  • Essay — Media, Communication and Information
  • GS2 — Executive and Judiciary - structure, organization and functioning
  • GS2 — Functions and responsibilities of Union and States
  • Prelims_GS — Constitution and Political System
  • Essay — Democracy, Governance and Public Administration
  • GS3 — Cyber security and communication networks in internal security
  • Prelims_GS — National Current Affairs
  • GS2 — Governance, transparency, accountability and e-governance
  • GS1 — Political philosophies and their effects on society

Mains Angle

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पिछले दशक में, India की डिजिटल गवर्नेंस ने कभी‑कभी सामग्री हटाने से सोशल मीडिया पर विरोधी आवाज़ों की व्यवस्थित सेंसरशिप की ओर बदलाव किया है। स्वतंत्र कार्यकर्ता और पत्रकारों ने बताया कि Union सरकार की West‑Asia नीति और LPG संकट की आलोचना करने वाले खातों को ब्लॉक किया गया है, जो ऑनलाइन सार्वजनिक क्षेत्र पर राज्य‑प्रेरित नियंत्रण की व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है।

मुख्य विकास (2021‑2026)

  • 2014 से 2021 तक, ब्लॉक किए गए URLs, पोस्ट और खाते 470 से बढ़कर 9,800 हो गए।
  • 2020‑21 के किसान विरोधों के दौरान, कई खातों को ब्लॉक किया गया; अंतरराष्ट्रीय दबाव ने सरकार को कुछ को पुनर्स्थापित करने पर मजबूर किया, जिससे संभावित सेंसरशिप के पैमाने का पता चला।
  • 2023 में, सरकार ने IT Rules के तहत आपातकालीन शक्ति का प्रयोग करके BBC डॉक्यूमेंट्री के लिंक को ब्लॉक किया, जिससे “सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा” की परिभाषा का विस्तार हुआ।
  • Karnataka हाई कोर्ट (2021‑22) ने Twitter (अब X) की ब्लॉकिंग आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया और जुर्माना लगाया, जिससे राज्य की सेंसरशिप स्थिति की न्यायिक स्वीकृति का संकेत मिला।
  • ब्लॉकिंग शक्तियों को कई मंत्रालयों में विकेंद्रीकृत करने के प्रस्ताव ऐसे शासन को जन्म दे सकते हैं जहाँ कोई भी विभाग विशेषज्ञ निगरानी के बिना आलोचकों को चुप करा सके।

महत्वपूर्ण कानूनी और प्रक्रियात्मक तथ्य

Supreme Court के Shreya Singhal मामले ने प्रक्रियात्मक सुरक्षा के आधार पर Section 69A की पुष्टि की। व्यवहार में, सरकार Rule 16 का उपयोग करके आदेशों को गुप्त रखती है, जिससे प्रभावित उपयोगकर्ताओं को अदालत में उनका विरोध करने का अवसर नहीं मिलता।

IT Rules 2009 के तहत बनाया गया ब्लॉकिंग कमेटी पूरी तरह से कार्यकारी है, जो अनुपातिकता के सिद्धांत और सुनवाई के अधिकार को कमजोर करता है। पूरे‑खाते पर प्रतिबंध t के बराबर हैं।

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डिजिटल सेंसरशिप में वृद्धि स्वतंत्र भाषण को खतरे में डालती है, भारत के संवैधानिक संतुलन की परीक्षा लेती है

Key Facts

  1. ब्लॉक किए गए URLs, पोस्ट और अकाउंट्स 2014 में 470 से बढ़कर 2021 तक 9,800 हो गए।
  2. 2020‑21 के किसान विरोधों के दौरान, कई प्रो‑फार्मर अकाउंट्स को ब्लॉक किया गया; कुछ को बाद में अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद पुनर्स्थापित किया गया।
  3. 2023 में सरकार ने BBC डॉक्यूमेंट्री को ब्लॉक करने के लिए IT Rules 2009 का उपयोग किया, जिससे ‘सार्वजनिक व्यवस्था के खतरे’ की परिभाषा को विस्तृत किया गया।
  4. कर्नाटक हाई कोर्ट (2021‑22) ने ट्विटर की ब्लॉक आदेशों के खिलाफ याचिका को खारिज किया और जुर्माना लगाया, राज्य की स्थिति का समर्थन किया।
  5. Shreya Singhal v. Union of India (2015) ने IT एक्ट के सेक्शन 69A की संवैधानिकता को प्रक्रियात्मक सुरक्षा के साथ बरकरार रखा।
  6. 2009 ब्लॉकिंग नियमों का Rule 16 सरकार को ब्लॉक आदेशों को गोपनीय रखने की अनुमति देता है, जिससे न्यायिक समीक्षा सीमित होती है।
  7. ब्लॉकिंग शक्तियों को विकेंद्रीकृत करने के प्रस्ताव किसी भी मंत्रालय को विशेष निगरानी के बिना सामग्री को ब्लॉक करने की अनुमति दे सकते हैं।

Background & Context

डिजिटल सेंसरशिप में वृद्धि सेक्शन 69A के तहत राज्य सुरक्षा शक्तियों और मौलिक अधिकार स्वतंत्र भाषण (आर्टिकल 19(1)(a)) के बीच टकराव को दर्शाती है। यह पारदर्शिता, जवाबदेही और शक्ति पृथक्करण से संबंधित शासन संबंधी चिंताएँ उठाती है, जो पॉलिटी, एथिक्स और डिजिटल इंडिया थीम्स को जोड़ती है।

UPSC Syllabus Connections

Essay•Media, Communication and InformationGS2•Executive and Judiciary - structure, organization and functioningGS2•Functions and responsibilities of Union and StatesPrelims_GS•Constitution and Political SystemEssay•Democracy, Governance and Public AdministrationGS3•Cyber security and communication networks in internal securityPrelims_GS•National Current AffairsGS2•Governance, transparency, accountability and e-governanceGS1•Political philosophies and their effects on society

Mains Answer Angle

GS2 – विश्लेषण करें कि कैसे डिजिटल सेंसरशिप का विस्तार प्रोपोर्शनैलिटी सिद्धांत की परीक्षा लेता है और सुरक्षा को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ संतुलित करने के लिए संस्थागत सुधारों का प्रस्ताव रखें।

Analysis

Practice Questions

GS1
Easy
Prelims MCQ

संवैधानिक कानून – अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम राज्य सुरक्षा

1 marks
4 keywords
GS2
Medium
Mains Short Answer

राजनीति – प्रशासनिक कानून एवं मौलिक अधिकार

5 marks
5 keywords
GS2
Hard
Mains Essay

शासन – डिजिटल सेंसरशिप, मौलिक अधिकार, संस्थागत जांच

25 marks
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