2025 में India के कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में केवल 0.7 % की वृद्धि हुई, जो 2001 के बाद से सबसे धीमी गति है। यह मंदी मुख्यतः power sector में गिरावट और आयातित कोयले के उपयोग में तीव्र गिरावट के कारण हुई, जबकि स्वच्छ‑ऊर्जा क्षमता ने रिकॉर्ड 47 GW सोलर, 6.3 GW पवन, 4 GW जल और 0.6 GW परमाणु जोड़ा।
Key Developments (2025)
- कुल CO2 उत्सर्जन में H2 2025 में 0.5 % और पूरे वर्ष में 0.7 % की वृद्धि हुई – दो दशकों से सबसे कम वृद्धि।
- Power‑sector उत्सर्जन में 3.8 % की गिरावट आई क्योंकि स्वच्छ‑ऊर्जा उत्पादन बढ़ा और बिजली की मांग कमजोर हुई।
- पावर प्लांटों में आयातित कोयले की खपत में 20 % की गिरावट आई।
- नई नवीकरणीय क्षमता ने लगभग 90 TWh बिजली उत्पन्न की – 2024 में जोड़ी गई स्वच्छ उत्पादन की दो गुना।
- पेट्रोकेमिकल और सीमेंट में तेल‑उत्पाद की मांग में 0.4 % की वृद्धि धीमी रही, जबकि नाफ़्था और पेटकोक का उपयोग घटा।
Important Facts
यह विश्लेषण CREA द्वारा किया गया था। इसने ईंधन उपयोग, औद्योगिक उत्पादन और पावर आउटपुट पर आधिकारिक डेटा की तुलना की। ऐतिहासिक रूप से, India के उत्सर्जन 1990 से औसतन 4.9 % प्रति वर्ष की दर से बढ़े हैं। इसलिए 2025 का आंकड़ा एक महत्वपूर्ण विचलन दर्शाता है।
2025 में नवीकरणीय जोड़ ने 90 TWh बिजली प्रदान की, जो FY 2026‑27 में अनुमानित मांग वृद्धि के 5.8 % तक को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, जैसा कि क्रेडिट‑रेटिंग एजेंसी ICRA ने कहा है। यह एक निकट “inflection point” का संकेत देता है जहाँ स्वच्छ‑ऊर्जा की वृद्धि मांग के बराबर या उससे अधिक हो सकती है।
भौगोलिक रूप से, कोयला‑आधारित उत्पादन में सबसे बड़ी कमी Gujarat, Tamil Nadu और Rajasthan में हुई – वही राज्य जो सोलर और पवन स्थापितियों में अग्रणी हैं।
Exam Relevance
India के clean energy संक्रमण की गतिशीलता को समझना GS‑3 (Economy & Environment) प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है, जो जलवायु नीति, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास से संबंधित हैं। गिरते हुए उत्सर्जन और सरकार की कोयला‑आधारित पावर विस्तार की योजनाओं के बीच का विरोधाभास भविष्य की नीति दिशा को निर्धारित करेगा।
