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Indian Institute of Astrophysics Study Links Solar Radio Burst Harmonics to Solar Longitude — Implications for Space‑Weather Forecasting

Indian Institute of Astrophysics की एक टीम ने 58 Type II सौर रेडियो बर्स्ट का विश्लेषण किया और पाया कि 75° से अधिक सौर लम्बाई वाले बर्स्ट में हार्मोनिक उत्सर्जन अधिक मजबूत होता है, जबकि डिस्क के केंद्र के निकट बर्स्ट में फंडामेंटल उत्सर्जन अधिक प्रबल होता है। यह खोज, जो कॉरोनल अपवर्तन और दृश्य‑कोण प्रभावों को कारण मानत…
सौर रेडियो बर्स्ट रहस्य हल: हार्मोनिक शक्ति सौर लम्बाई से जुड़ी Researcherों ने Indian Institute of Astrophysics (IIA) ने यह समझाया कि fundamental और harmonic रेडियो तरंगों की सापेक्ष शक्ति विभिन्न सौर घटनाओं में क्यों बदलती है। उनके निष्कर्ष solar coronal shocks की समझ को बेहतर बनाते हैं और अधिक सटीक space‑weather forecasting में मदद करते हैं। मुख्य विकास ग्लोबल CALLISTO एरे द्वारा रिकॉर्ड किए गए 58 Type II bursts का विश्लेषण। गौरिबिदानुर रेडियो ऑब्ज़र्वेटरी में स्थित GLOSS उपकरण से डेटा का उपयोग करके बर्स्ट के मूल को ट्रेस किया गया। 75° से अधिक हेलियोग्राफिक लम्बाई वाले सक्रिय क्षेत्रों से उत्पन्न बर्स्ट में हार्मोनिक उत्सर्जन अधिक प्रबल दिखा; 75° से कम लम्बाई वाले बर्स्ट में फंडामेंटल उत्सर्जन अधिक प्रबल। कॉरॉना में अपवर्तक प्रभाव, दिशा‑निर्देशता और दृश्य‑कोण इस पैटर्न को समझाते हैं: हार्मोनिक का कोन अधिक विस्तृत होता है, जिससे पृथ्वी पर उनका पता चलना संभव होता है जबकि फंडामेंटल अवरुद्ध हो सकते हैं। महत्वपूर्ण तथ्य • हेलियोग्राफिक लम्बाई सूर्य के डिस्क पर किसी सक्रिय क्षेत्र की पूर्व‑पश्चिम स्थिति को मापने वाला सौर निर्देशांक है। • फंडामेंटल उत्सर्जन सैद्धांतिक रूप से प्रमुख होना चाहिए, परन्तु अब अवलोकन दिखाते हैं कि लम्बाई‑निर्भर उलटाव प्रणालीबद्ध है। • अध्ययन ने 26 Oct 2023 (फंडामेंटल अधिक प्रबल) और 16
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Quick Reference

Key Insight

सौर रेडियो बर्स्ट हार्मोनिक्स जो सौर देशांतर से जुड़े हैं, India की स्पेस‑वेदर पूर्वानुमान क्षमता को बढ़ाते हैं

Key Facts

  1. IIA ने वैश्विक CALLISTO नेटवर्क और GLOSS स्पेक्ट्रोग्राफ का उपयोग करके 58 टाइप II सौर रेडियो बर्स्ट का विश्लेषण किया।
  2. हेलियोग्राफिक देशांतर > 75° वाले बर्स्ट में हार्मोनिक उत्सर्जन अधिक मजबूत दिखता है; < 75° वाले बर्स्ट में मूल (फंडामेंटल) उत्सर्जन अधिक मजबूत होता है।
  3. मुख्य केस स्टडीज़: 26 Oct 2023 (फंडामेंटल प्रमुख) और 16 Jul 2024 (हार्मोनिक प्रमुख)।
  4. हार्मोनिक उत्सर्जन का कोन कोण अधिक विस्तृत होता है, जिससे पृथ्वी पर detection संभव है भले ही फंडामेंटल रिफ्रैक्ट या ब्लॉक हो जाएँ।
  5. परिणाम ISRO और Ministry of Earth Sciences को वास्तविक‑समय स्पेस‑वेदर प्रारम्भिक‑चेतावनी मॉडल को परिष्कृत करने में मदद करते हैं।
  6. भविष्य की रूपरेखा: CALLISTO डेटाबेस का विस्तार करना और बड़े‑पैमाने पर पैटर्न खोज के लिए मशीन‑लर्निंग लागू करना

Background

सौर कोरोनल शॉक्स और रेडियो बर्स्ट की विशेषताओं को समझना स्पेस‑वेदर पूर्वानुमान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो GS‑4 का मुख्य विषय है। यह अध्ययन दर्शाता है कि स्वदेशी वैज्ञानिक अनुसंधान (IIA, DST) कैसे सीधे ISRO और MoES को सौर व्यवधानों के खिलाफ उपग्रह, विमानन और रक्षा संचार की सुरक्षा में समर्थन कर सकता है।

UPSC Syllabus

  • GS3 — Developments in science and technology and their applications
  • Essay — Science, Technology and Society

Mains Angle

खोज को मजबूत स्पेस‑वेदर भविष्यवाणी प्रणालियों की आवश्यकता और भारतीय अनुसंधान संस्थानों की प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता में भूमिका (GS‑4, GS‑1) से जोड़ें। संभावित प्रश्न: “सौर भौतिकी में प्रगति कैसे India की स्पेस‑वेदर पूर्वानुमान को सुदृढ़ कर सकती है और इसका राष्ट्रीय सुरक्षा तथा बुनियादी ढांचे पर क्या प्रभाव पड़ेगा?”

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Overview

Full Article

सौर रेडियो बर्स्ट रहस्य हल: हार्मोनिक शक्ति सौर लम्बाई से जुड़ी

Researcherों ने Indian Institute of Astrophysics (IIA) ने यह समझाया कि fundamental और harmonic रेडियो तरंगों की सापेक्ष शक्ति विभिन्न सौर घटनाओं में क्यों बदलती है। उनके निष्कर्ष solar coronal shocks की समझ को बेहतर बनाते हैं और अधिक सटीक space‑weather forecasting में मदद करते हैं।

मुख्य विकास

  • ग्लोबल CALLISTO एरे द्वारा रिकॉर्ड किए गए 58 Type II bursts का विश्लेषण।
  • गौरिबिदानुर रेडियो ऑब्ज़र्वेटरी में स्थित GLOSS उपकरण से डेटा का उपयोग करके बर्स्ट के मूल को ट्रेस किया गया।
  • 75° से अधिक हेलियोग्राफिक लम्बाई वाले सक्रिय क्षेत्रों से उत्पन्न बर्स्ट में हार्मोनिक उत्सर्जन अधिक प्रबल दिखा; 75° से कम लम्बाई वाले बर्स्ट में फंडामेंटल उत्सर्जन अधिक प्रबल।
  • कॉरॉना में अपवर्तक प्रभाव, दिशा‑निर्देशता और दृश्य‑कोण इस पैटर्न को समझाते हैं: हार्मोनिक का कोन अधिक विस्तृत होता है, जिससे पृथ्वी पर उनका पता चलना संभव होता है जबकि फंडामेंटल अवरुद्ध हो सकते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

• हेलियोग्राफिक लम्बाई सूर्य के डिस्क पर किसी सक्रिय क्षेत्र की पूर्व‑पश्चिम स्थिति को मापने वाला सौर निर्देशांक है।
• फंडामेंटल उत्सर्जन सैद्धांतिक रूप से प्रमुख होना चाहिए, परन्तु अब अवलोकन दिखाते हैं कि लम्बाई‑निर्भर उलटाव प्रणालीबद्ध है।
• अध्ययन ने 26 Oct 2023 (फंडामेंटल अधिक प्रबल) और 16 

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सौर रेडियो बर्स्ट हार्मोनिक्स जो सौर देशांतर से जुड़े हैं, India की स्पेस‑वेदर पूर्वानुमान क्षमता को बढ़ाते हैं

Key Facts

  1. IIA ने वैश्विक CALLISTO नेटवर्क और GLOSS स्पेक्ट्रोग्राफ का उपयोग करके 58 टाइप II सौर रेडियो बर्स्ट का विश्लेषण किया।
  2. हेलियोग्राफिक देशांतर > 75° वाले बर्स्ट में हार्मोनिक उत्सर्जन अधिक मजबूत दिखता है; < 75° वाले बर्स्ट में मूल (फंडामेंटल) उत्सर्जन अधिक मजबूत होता है।
  3. मुख्य केस स्टडीज़: 26 Oct 2023 (फंडामेंटल प्रमुख) और 16 Jul 2024 (हार्मोनिक प्रमुख)।
  4. हार्मोनिक उत्सर्जन का कोन कोण अधिक विस्तृत होता है, जिससे पृथ्वी पर detection संभव है भले ही फंडामेंटल रिफ्रैक्ट या ब्लॉक हो जाएँ।
  5. परिणाम ISRO और Ministry of Earth Sciences को वास्तविक‑समय स्पेस‑वेदर प्रारम्भिक‑चेतावनी मॉडल को परिष्कृत करने में मदद करते हैं।
  6. भविष्य की रूपरेखा: CALLISTO डेटाबेस का विस्तार करना और बड़े‑पैमाने पर पैटर्न खोज के लिए मशीन‑लर्निंग लागू करना

Background & Context

सौर कोरोनल शॉक्स और रेडियो बर्स्ट की विशेषताओं को समझना स्पेस‑वेदर पूर्वानुमान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो GS‑4 का मुख्य विषय है। यह अध्ययन दर्शाता है कि स्वदेशी वैज्ञानिक अनुसंधान (IIA, DST) कैसे सीधे ISRO और MoES को सौर व्यवधानों के खिलाफ उपग्रह, विमानन और रक्षा संचार की सुरक्षा में समर्थन कर सकता है।

UPSC Syllabus Connections

GS3•Developments in science and technology and their applicationsEssay•Science, Technology and Society

Mains Answer Angle

खोज को मजबूत स्पेस‑वेदर भविष्यवाणी प्रणालियों की आवश्यकता और भारतीय अनुसंधान संस्थानों की प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता में भूमिका (GS‑4, GS‑1) से जोड़ें। संभावित प्रश्न: “सौर भौतिकी में प्रगति कैसे India की स्पेस‑वेदर पूर्वानुमान को सुदृढ़ कर सकती है और इसका राष्ट्रीय सुरक्षा तथा बुनियादी ढांचे पर क्या प्रभाव पड़ेगा?”

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