<h3>अवलोकन</h3>
<p>Supreme Court ने Sabarimala मामले की पुनः परीक्षा के लिए नौ‑जज बेंच गठित की है। 7 April 2026 को निर्धारित सुनवाई में सात प्रमुख प्रश्नों को संबोधित किया जाएगा जो धार्मिक स्वतंत्रता, धार्मिक संप्रदायों के अधिकार और न्यायिक समीक्षा के दायरे को छूते हैं।</p>
<h3>मुख्य विकास</h3>
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<li><strong>तारीख और समय:</strong> 7 April 2026, 4:04 PM IST – लाइव कार्यवाही शुरू हुई।</li>
<li><strong>बेंच संरचना:</strong> CJI Surya Kant अध्यक्षता करते हैं, साथ में Justices BV Nagarathna, MM Sundresh, Ahsanuddin Amanullah, Aravind Kumar, Augustine George Masih, Prasanna B Varale, R Mahadevan और Joymalya Bagchi शामिल हैं।</li>
<li><strong>सात प्रश्न:</strong> बेंच Article 25 के दायरे, Article 26 के साथ अंतःक्रिया, "sections of Hindus" का अर्थ, संवैधानिक नैतिकता की भूमिका, और यह कि क्या गैर‑सदस्य धार्मिक प्रथा के खिलाफ PIL दायर कर सकता है, पर विचार करेगी।</li>
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<h3>महत्वपूर्ण तथ्य</h3>
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<li>बेंच यह जांचेगा कि क्या Article 26 के तहत अधिकार केवल तीन पारंपरिक प्रतिबंधों (सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य) के अधीन हैं या Part III के अन्य प्रावधान भी लागू होते हैं।</li>
<li>चर्चाओं ने "essential religious practice" परीक्षण को उजागर किया और विरोधी प्रावधानों की सामंजस्यपूर्ण व्याख्या की आवश्यकता पर बल दिया।</li>
<li>जजों ने Article 26 के उप‑धारा 2(b) की सक्षम प्रकृति पर बहस की...</li>
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