समीक्षा
Supreme Court of India ने Lokpal द्वारा दायर याचिका को स्वीकार किया है, जिसमें Delhi High Court के उस निर्णय को चुनौती दी गई है कि इस Act में दो अलग‑अलग sanctions की व्यवस्था नहीं है – एक Chargesheet दाखिल करने के लिए और दूसरा Prosecution शुरू करने के लिए। यह मामला Trinamool Congress MP Mahua Moitra से जुड़ी cash‑for‑query विवाद से उत्पन्न हुआ है।
मुख्य विकास
- Supreme Court bench of CJI Surya Kant और Justice Joymalya Bagchi ने Mahua Moitra को नोटिस जारी किया और मामले की जांच करने पर सहमति व्यक्त की।
- Court ने स्पष्ट किया कि Lokpal को High Court की अंतरिम दिशा (para 89) के तहत एक महीने के भीतर नया sanction देने की आवश्यकता नहीं है।
- दोनों पक्षों के वरिष्ठ वकीलों ने मुख्य बिंदु उजागर किया: क्या Section 20(7)(a) और Section 20(8) दो अलग‑अलग sanction चरण बनाते हैं।
- High Court ने पहले Lokpal के CBI को Moitra के खिलाफ Chargesheet दाखिल करने के sanction को निरस्त कर दिया था।
- Supreme Court ने अन्य High Court के निर्णयों के खिलाफ Lokpal द्वारा दायर समान याचिकाओं को भी नोटिस जारी किया।
महत्वपूर्ण तथ्य
1. विवाद की पृष्ठभूमि: Moitra पर व्यापारी Darshan Hiranandani से नकद प्राप्त करने का आरोप है, बदले में उन्होंने parliamentary प्रश्न उठाए। उन्होंने अपने लॉगिन विवरण साझा करने को स्वीकार किया, लेकिन किसी भी वित्तीय प्राप्ति को नकारा।
2. कानूनी क्रम: BJP MP Nishikant Dubey की शिकायत के बाद, Lokpal ने Section 20(7)(a) के तहत sanction दिया। Delhi High Court ने कहा कि यह sanction अनुचित था क्योंकि Act केवल एक एकल, संयुक्त sanction प्रदान करता है, दो अलग‑अलग नहीं।
3. High Court की तर्क: इसने देखा कि Section 20(8) केवल अभियोजन एजेंसी को निर्देशित करता है और ...
