Overview
The Supreme Court ने अवैध रेत निकासी को लेकर राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में suo motu cognizance लिया है। Justices Vikram Nath और Sandeep Mehta के नेतृत्व में एक बेंच ने चेतावनी दी कि राजस्थान, Madhya Pradesh और Uttar Pradesh के अधिकारी vicariously liable ठहराए जा सकते हैं, क्योंकि उन्होंने illegal sand mining को अनुमति दी, जो gharials जैसे लुप्तप्राय जलीय जीवों को खतरा पहुंचाता है।
Key Developments
- Court ने कहा कि संरक्षित क्षेत्र में किसी भी वन्यजीव आवास के विनाश पर Wildlife Protection Act, Environment Protection Act, Forest Conservation Act, Biological Diversity Act और Indian Forest Act के तहत दंड लागू होते हैं।
- तीन राज्यों के Forest, Mining, Water Resources विभागों और पुलिस के अधिकारियों को "उनकी सुस्ती और निष्क्रियता के कारण liable" कहा गया।
- Principal Secretaries, DGPs और Ministry of Environment, Forest and Climate Change को नोटिस जारी किया जाएगा; वरिष्ठ वकील Nikhil Goel और Rupali Samuel को Amicus Curiae के रूप में नियुक्त किया गया।
- संबंधित राज्यों की प्रतिक्रियाओं के बाद आगे विस्तृत निर्देश जारी किए जाएंगे; अगली सुनवाई 2 April 2026 को निर्धारित है।
Important Facts
यह मामला, जिसका शीर्षक IN RE: Illegal Sand Mining in the National Chambal Sanctuary and Threat to Endangered Aquatic Wildlife Versus, SMW(C) No. 2/2026 है, नदी पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा के लिए बहु‑विधायी ढांचे को उजागर करता है। यह अभयारण्य, जो तीन राज्यों में फैला है, गंभीर रूप से लुप्तप्राय gharial (Gavialis gangeticus) और गंगा डॉल्फिन का आवास है। अनियंत्रित रेत खनन नदी के प्रवाह को बदलता है, घोंसले के स्थानों को नष्ट करता है और इन प्रजातियों की मृत्यु दर बढ़ाता है।
UPSC Relevance
GS‑2 (Polity) अभ्यर्थियों के लिए, यह निर्णय दर्शाता है कि कैसे पर्यावरणीय कानूनों का अनुप्रयोग और वैरिकियसली उत्तरदायित्व सिद्धांत प्रशासनिक जवाबदेही को सुदृढ़ करता है, जो परीक्षा में अक्सर पूछे जाने वाले मुद्दों में से एक है।
