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Supreme Court ने गृहिणियों को राष्ट्र निर्माणकर्ता घोषित किया, न्यूनतम मुआवजा Rs 30,000/माह निर्धारित किया

11 June 2026 को, Supreme Court ने फैसला सुनाया कि गृहिणियों को “nation builders” माना जाता है और घरेलू देखभाल के नुकसान के लिए उन्हें कम से कम Rs 30,000 प्रति माह का मुआवजा देना अनिवार्य है, विशेष रूप से motor vehicle accidents में। यह निर्णय बिना वेतन वाले घर के काम की मूल्यांकन के लिए एक कानूनी मानक स्थापित करता है, जो आर्थिक और सामाजिक नीति विचारों से जुड़ा है, जो UPSC aspirants के लिए प्रासंगिक है।
On 11 June 2026 , the Supreme Court ने एक ऐतिहासिक निर्णय दिया जिसमें आर्थिक और सामाजिक भूमिका को मान्यता दी गई है homemakers की, जिन्हें nation builders कहा गया। कोर्ट ने आदेश दिया कि उनका योगदान कम से कम Rs 30,000 per month के रूप में मापा जाए। Key Developments कोर्ट ने कहा कि जब एक गृहिणी motor vehicle accident में मरती है, तो घरेलू देखभाल के नुकसान को एक अलग हेड के रूप में compensation के रूप में दिया जाना चाहिए। घरेलू देखभाल के नुकसान के लिए न्यूनतम मुआवजा Rs 30,000 per month निर्धारित किया गया, जिससे एक वैधानिक मानक स्थापित हुआ। निर्णय यह रेखांकित करता है कि बिना वेतन वाले घर के काम का आर्थिक मूल्य मापनीय है और इसे कानूनी राहत के लिए औपचारिक रोजगार के समान माना जाना चाहिए। Important Facts Judgment date: 11 June 2026 । Quantified value: प्रत्येक गृहिणी के लिए Rs 30,000 per month । Applicable when the death occurs due to a motor vehicle accident। कोर्ट ने गृहिणियों को nation‑building के आवश्यक योगदानकर्ता बताया, जिससे बिना वेतन वाली देखभाल को आर्थिक विकास से जोड़ा गया। UPSC Relevance यह निर्णय कई UPSC सिलेबस क्षेत्रों को छूता है। GS 2 (Polity) में यह न्यायिक सक्रियता और अधिकारों के विस्तार में न्यायपालिका की भूमिका को दर्शाता है। GS 3 (Economy) में यह बिना वेतन वाले श्रम को मात्रात्मक बनाता है, जो अनौपचारिक क्षेत्र और लिंग‑समावेशी विकास का एक महत्वपूर्ण घटक है। Nation builders की अवधारणा…
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Quick Reference

Key Insight

Supreme Court गृहिणियों को महत्व देता है, देखभाल के नुकसान के लिए Rs 30,000 मासिक मुआवजा निर्धारित करता है

Key Facts

  1. Supreme Court का निर्णय दिनांक 11 June 2026 गृहिणियों को nation‑builders के रूप में मानता है।
  2. कोर्ट ने घरेलू देखभाल के नुकसान के लिए Rs 30,000 प्रति माह का न्यूनतम मुआवजा निर्धारित किया।
  3. मुआवजा तब लागू होता है जब एक गृहिणी motor vehicle accident में मर जाती है।
  4. यह राशि बिना वेतन वाले घर के काम के मूल्यांकन के लिए एक वैधानिक मानक स्थापित करती है।
  5. यह निर्णय Motor Vehicles Act और मुआवजा statutes के दायरे को विस्तारित करता है।
  6. यह लिंग‑समावेशी विकास में बिना वेतन वाली देखभाल के आर्थिक मूल्य को उजागर करता है।

Background

यह निर्णय बिना वेतन वाले घर के काम को औपचारिक आर्थिक गतिविधि से जोड़ता है, जो GS‑3 में अनौपचारिक क्षेत्र और लिंग समानता के प्रमुख मुद्दे हैं। यह न्यायिक सक्रियता को भी दर्शाता है, जो GS‑2 में एक सामान्य विषय है, जहाँ अदालतें संविधान की व्याख्या करके सामाजिक अधिकारों का विस्तार करती हैं।

Mains Angle

Mains उत्तर में, चर्चा करें कि यह निर्णय लिंग‑सेंसिटिव नीति को कैसे आगे बढ़ाता है और सामाजिक कल्याण को पुनर्परिभाषित करने में न्यायपालिका की भूमिका क्या है। (GS‑2/GS‑3)

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gs.gs272% UPSC Relevance5 min read

Full Article

On 11 June 2026, the Supreme Court ने एक ऐतिहासिक निर्णय दिया जिसमें आर्थिक और सामाजिक भूमिका को मान्यता दी गई है homemakers की, जिन्हें nation builders कहा गया। कोर्ट ने आदेश दिया कि उनका योगदान कम से कम Rs 30,000 per month के रूप में मापा जाए।

Key Developments

  • कोर्ट ने कहा कि जब एक गृहिणी motor vehicle accident में मरती है, तो घरेलू देखभाल के नुकसान को एक अलग हेड के रूप में compensation के रूप में दिया जाना चाहिए।
  • घरेलू देखभाल के नुकसान के लिए न्यूनतम मुआवजा Rs 30,000 per month निर्धारित किया गया, जिससे एक वैधानिक मानक स्थापित हुआ।
  • निर्णय यह रेखांकित करता है कि बिना वेतन वाले घर के काम का आर्थिक मूल्य मापनीय है और इसे कानूनी राहत के लिए औपचारिक रोजगार के समान माना जाना चाहिए।

Important Facts

  • Judgment date: 11 June 2026।
  • Quantified value: प्रत्येक गृहिणी के लिए Rs 30,000 per month।
  • Applicable when the death occurs due to a motor vehicle accident।
  • कोर्ट ने गृहिणियों को nation‑building के आवश्यक योगदानकर्ता बताया, जिससे बिना वेतन वाली देखभाल को आर्थिक विकास से जोड़ा गया।

UPSC Relevance

यह निर्णय कई UPSC सिलेबस क्षेत्रों को छूता है। GS 2 (Polity) में यह न्यायिक सक्रियता और अधिकारों के विस्तार में न्यायपालिका की भूमिका को दर्शाता है। GS 3 (Economy) में यह बिना वेतन वाले श्रम को मात्रात्मक बनाता है, जो अनौपचारिक क्षेत्र और लिंग‑समावेशी विकास का एक महत्वपूर्ण घटक है। Nation builders की अवधारणा…

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Supreme Court गृहिणियों को महत्व देता है, देखभाल के नुकसान के लिए Rs 30,000 मासिक मुआवजा निर्धारित करता है

Key Facts

  1. Supreme Court का निर्णय दिनांक 11 June 2026 गृहिणियों को nation‑builders के रूप में मानता है।
  2. कोर्ट ने घरेलू देखभाल के नुकसान के लिए Rs 30,000 प्रति माह का न्यूनतम मुआवजा निर्धारित किया।
  3. मुआवजा तब लागू होता है जब एक गृहिणी motor vehicle accident में मर जाती है।
  4. यह राशि बिना वेतन वाले घर के काम के मूल्यांकन के लिए एक वैधानिक मानक स्थापित करती है।
  5. यह निर्णय Motor Vehicles Act और मुआवजा statutes के दायरे को विस्तारित करता है।
  6. यह लिंग‑समावेशी विकास में बिना वेतन वाली देखभाल के आर्थिक मूल्य को उजागर करता है।

Background & Context

यह निर्णय बिना वेतन वाले घर के काम को औपचारिक आर्थिक गतिविधि से जोड़ता है, जो GS‑3 में अनौपचारिक क्षेत्र और लिंग समानता के प्रमुख मुद्दे हैं। यह न्यायिक सक्रियता को भी दर्शाता है, जो GS‑2 में एक सामान्य विषय है, जहाँ अदालतें संविधान की व्याख्या करके सामाजिक अधिकारों का विस्तार करती हैं।

Mains Answer Angle

Mains उत्तर में, चर्चा करें कि यह निर्णय लिंग‑सेंसिटिव नीति को कैसे आगे बढ़ाता है और सामाजिक कल्याण को पुनर्परिभाषित करने में न्यायपालिका की भूमिका क्या है। (GS‑2/GS‑3)

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