Supreme Court West Bengal Govt के खिलाफ Article 32 के तहत ED की रिट पेटिशन की समीक्षा कर रहा है
अवलोकन
Constitution Bench जिसमें Justice Prashant Kumar Mishra और Justice N.V. Anjaria शामिल हैं, Enforcement Directorate (ED) द्वारा दायर पेटिशन की सुनवाई कर रहा है। ED का आरोप है कि West Bengal प्रशासन, जिसका नेतृत्व Chief Minister Mamata Banerjee कर रही हैं, ने 8 जनवरी 2026 को Kolkata में राजनीतिक परामर्श फर्म I‑PAC पर अपनी छापेमारी में बाधा डाली, जो कोयला घोटाले के मनी‑लॉन्डरिंग जांच से जुड़ी है। ED Chief Minister और राज्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ CBI FIR दर्ज करने की मांग कर रहा है।
मुख्य विकास
- ED ने राज्य को FIR दर्ज करने के लिए बाध्य करने हेतु Article 32 का प्रयोग किया है, यह तर्क देते हुए कि उसके वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
- Senior Advocate Shyam Divan तर्क देते हैं कि ED के पास कानूनी व्यक्तित्व नहीं है और इसलिए वह मूलभूत अधिकारों की सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता, जिससे federal structure को खतरा है, यह चेतावनी देते हैं।
- Divan यह इंगित करते हैं कि Prevention of Money Laundering Act (PMLA) जैसे कानून ED को “मुकदमा करने का अधिकार” नहीं देते, जबकि SEBI जैसे निकायों को यह अधिकार है।
- Justice Mishra ने व्यावहारिक दुविधा उठाई: यदि Article 32 और Article 226 दोनों उपलब्ध नहीं हैं, तो जब कोई राज्य कथित रूप से बाधा डालता है तो कौन सा उपाय मौजूद है।