Key Insight
दिल्ली ने HEVs और PHEVs के लिए कर छूट का विस्तार किया, जिससे भारत के 2030 EV‑30 लक्ष्य को सुदृढ़ किया गया।
Key Facts
- दिल्ली 2026 से रोड‑टैक्स और रजिस्ट्रेशन‑फ़ी माफी को हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (HEV) और प्लग‑इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (PHEV) तक विस्तारित करेगी, पहले यह केवल बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (BEV) तक सीमित थी।
- यह माफी दिल्ली में पंजीकृत नए निजी और वाणिज्यिक पैसेंजर वाहनों दोनों पर लागू होगी।
- EV30@30 पहल के तहत भारत का राष्ट्रीय लक्ष्य 2030 तक कुल वाहन बिक्री में 30% इलेक्ट्रिक वाहन हिस्सेदारी हासिल करना है, साथ ही 2030 तक कार्बन‑इंटेंसिटी को 45% से नीचे लाना और 2070 तक नेट‑जीरो प्राप्त करना है।
- प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) – ऑटो योजना 14 सेक्टरों को कवर करती है, कम से कम 50% घरेलू वैल्यू ऐडिशन की शर्त लगाती है, और EV घटक निर्माताओं को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
- PM E‑Drive, जो 1 अक्टूबर 2024 को लॉन्च हुआ, FAME II योजना को प्रतिस्थापित करता है, और अग्रिम खरीद सब्सिडी (BEV के लिए अधिकतम ₹1.5 लाख, PHEV/HEV के लिए ₹1 लाख) तथा चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए पूँजी समर्थन प्रदान करता है।
- पूरक केंद्रीय योजनाओं में e‑AMRIT (इलेक्ट्रिक दो‑पहिया वाहनों के लिए सब्सिडी) और इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स शामिल हैं, जो राज्य‑वार EV अपनाने को ट्रैक करता है।
Background
EV अपनाने को तेज करना भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं और तेल आयात पर निर्भरता कम करने तथा घरेलू बैटरी इकोसिस्टम को विकसित करने के आर्थिक लक्ष्यों के साथ संरेखित है। दिल्ली की कर माफी जैसी राज्य‑स्तरीय प्रोत्साहन केंद्रीय योजनाओं (PLI‑Auto, PM E‑Drive) के साथ मिलकर GS 3 (पर्यावरण, अर्थव्यवस्था) और GS 2 (शासन) के बीच एक समन्वित नीति ढांचा बनाते हैं।
UPSC Syllabus
- Prelims_GS — Environmental Issues and Climate Change
- Essay — Environment and Sustainability
- Essay — Economy, Development and Inequality
Mains Angle
मुख्य उत्तर में, चर्चा करें कि कैसे वित्तीय प्रोत्साहन (कर छूट, सब्सिडी) और उत्पादन‑संबंधित प्रोत्साहन मिलकर बाजार, बुनियादी ढाँचा और निर्माण की बाधाओं को दूर करते हैं, और यह GS 3 (पर्यावरण/अर्थव्यवस्था) तथा GS 2 (नीति कार्यान्वयन) से कैसे जुड़ता है।