Supreme Court ने यह फैसला सुनाया कि Air Force Group Insurance Society (AFGIS) Article 12 के अर्थ में ‘State’ है। परिणामस्वरूप, AFGIS writ jurisdiction के अधीन है और उसके निर्णयों को अदालतों में चुनौती दी जा सकती है।
मुख्य विकास
- Justices Sanjay Karol और Vipul M. Pancholi की बेंच ने Delhi High Court के इस मत को खारिज कर दिया कि AFGIS एक निजी कल्याण योजना थी।
- Court ने इस बात पर ज़ोर दिया कि AFGIS सार्वजनिक कार्य करता है जो State की भारतीय Air Force के कर्मियों के प्रति दायित्व से निकटता से जुड़ा है।
- राष्ट्रपति की स्वीकृति, डिप्यूटेशन नियम, अनिवार्य सदस्यता, और पूरी तरह से सेवा में रहे अधिकारियों से बना बोर्ड जैसे कारकों को State की instrumentality के संकेतक माना गया।
- यह निर्णय वेतन‑मानक संशोधनों के विवाद से उत्पन्न हुआ: बोर्ड ने 2016 में वेतन को Sixth Central Pay Commission के साथ संरेखित किया, फिर 2017 में निर्णय को उलट दिया, जिससे कर्मचारियों ने याचिकाएँ दायर कीं।
महत्वपूर्ण तथ्य
• AFGIS को राष्ट्रपति आदेश द्वारा स्थापित किया गया था; इसके डिप्यूटेशन नियम भी राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित हैं।
• मासिक नकदी‑प्रवाह रिपोर्टें Assistant Chief of Air Staff को भेजी जाती हैं, जिससे निरंतर सरकारी निगरानी सुनिश्चित होती है।
• सदस्यता और प्रीमियम कटौतियाँ सभी सेवा में रहे IAF अधिकारियों के लिए अनिवार्य हैं।
