<h3>परिचय</h3>
<p>Supreme Court ने मामले Ashish Dave v. State of Rajasthan (SLP(Crl) No. 19369/2025) में दोहराया कि Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 की Section 173(3) अस्पष्ट और संदिग्ध आरोपों पर FIR की Mechanical Registration को रोकने के लिए बनाई गई है।</p>
<h3>मुख्य विकास</h3>
<ul>
<li>Court ने इस बात पर ज़ोर दिया कि FIR की पंजीकरण prima facie केस पर आधारित होना चाहिए, न कि अनुमानित या बिना प्रमाण के दावों पर।</li>
<li>Section 173(3) अब शिकायतों की "mechanical registration" के खिलाफ एक वैधानिक जाँच के रूप में कार्य करता है।</li>
<li>निर्णय यह रेखांकित करता है कि पुलिस अधिकारियों को विवेक का प्रयोग करना और FIR दाखिल करने से पहले प्रारंभिक मूल्यांकन करना आवश्यक है।</li>
<li>यह निर्णय पूरे भारत में सभी निचली अदालतों और पुलिस प्राधिकरणों के लिए बाध्यकारी है, जो BNSS द्वारा प्रस्तुत प्रक्रियात्मक सुरक्षा को मजबूत करता है।</li>
</ul>
<h3>महत्वपूर्ण तथ्य</h3>
<p>याचिका Special Leave Petition (Criminal) के तहत दायर की गई थी, जिसमें State of Rajasthan के खिलाफ FIR प्रावधानों के दुरुपयोग का आरोप था। Court का अवलोकन BNSS के व्यापक उद्देश्य के साथ मेल खाता है, जो निरर्थक आपराधिक शिकायतों को कम करने और नागरिकों को उत्पीड़न से बचाने के लिए है।</p>
<h3>UPSC प्रासंगिकता</h3>
<p>यह विकास GS 2 (Polity) के लिए प्रासंगिक है क्योंकि यह आपराधिक न्याय प्रणाली के कार्य, न्यायपालिका की भूमिका, और विधायी सुधारों से संबंधित है। अभ्यर्थियों को यह ध्यान देना चाहिए कि Section 173(3) जैसे वैधानिक सुरक्षा उपाय सरकार की कानून प्रवर्तन की दक्षता और नागरिक स्वतंत्रताओं के बीच संतुलन बनाने की मंशा को दर्शाते हैं। केस यह भी दर्शाता है</p>