<h2>Overview</h2>
<p>Supreme Court ने हाल ही में कहा कि राजस्थान में District Milk Unions स्वतंत्र सहकारी समाज हैं और इसलिए High Courts के व्रिट अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं हैं। यह निर्णय Article 12 के तहत State‑entity की स्थिति के लिए संवैधानिक परीक्षण को स्पष्ट करता है और Article 226 के तहत High Court की शक्ति की सीमा को दर्शाता है।</p>
<h3>Key Developments</h3>
<ul>
<li>Rajasthan High Court ने District Milk Unions के Bye‑law Nos. 20.1(2), 20.1(4), 20.2(7) और 20.2(9) को चुनौती देने वाले व्रिट याचिकाओं को स्वीकार करने में त्रुटि की।</li>
<li>Supreme Court ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सहकारी समाज, चाहे वे वैधानिक रूप से नियमन किए गए हों, तब तक “State के साधन” नहीं होते जब तक वे सार्वजनिक कार्य नहीं करते।</li>
<li>सहकारी संस्थाओं के आंतरिक शासन और चुनावों से जुड़े विवादों को Rajasthan Co‑operative Societies Act, 2001 के वैधानिक तंत्र के माध्यम से, विशेष रूप से Section 58 के तहत सुलझाना होगा।</li>
<li>Court ने Ajay Hasia v. Khalid Mujib Sehravardi और Thalappalam Service Co‑operative Bank Ltd. v. State of Kerala जैसे पूर्वनिर्णयों का उल्लेख किया ताकि निजी संस्थाओं पर व्रिट अधिकार क्षेत्र की सीमित पहुँच को रेखांकित किया जा सके।</li>
</ul>
<h3>Important Facts</h3>
<p>• विवाद राजस्थान के विभिन्न District Milk Unions के Management Committee (Board of Directors) के चुनावों से उत्पन्न हुआ।<br>
• Primary Society के प्रतिनिधियों ने Article 226 के तहत व्रिट याचिकाओं द्वारा Bye‑laws को चुनौती दी।<br>
• Rajasthan High Court के एकल न्यायाधीश ने Bye‑laws को ultra vires घोषित किया; एक Division Bench ने इस निर्णय को पुष्टि की।<br>
• अपीलकर्ता, जो व्रिट प्रक्रिया के पक्ष नहीं थे, Supreme Court के पास पहुंचे, जिसने High Court के अधिकार क्षेत्र को रद्द कर दिया।</p>