The Supreme Court on 25 May 2026 ने Madhya Pradesh High Court के आदेश को निरस्त किया और वैवाहिक विवाद में पति के रिश्तेदारों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को खारिज कर दिया। Court ने कहा कि अस्पष्ट, सामान्य आरोप Domestic Violence Act या Dowry Prohibition Act के तहत अभियोजन का समर्थन नहीं कर सकते जब तक विशिष्ट कार्य सिद्ध न हों।
मुख्य विकास
- Bench of Justices Sanjay Karol and Nongmeikapam Kotiswar Singh ने शिकायतकर्ता के इन‑लॉज़ द्वारा दायर अपील को स्वीकार किया।
- Court ने इन‑लॉज़ के खिलाफ आरोपों को “omnibus and broadly worded” कहा और इसलिए आपराधिक उत्तरदायित्व के लिए अपर्याप्त माना।
- Section 498A IPC के तहत FIR और DV Act केस दोनों को खारिज कर दिया गया।
- निर्णय ने यह ज़ोर दिया कि आपराधिक कानून को व्यक्तिगत या पारिवारिक शिकायतों को सुलझाने के साधन के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
महत्वपूर्ण तथ्य
- विवाद नवंबर 2019 में हुई शादी से उत्पन्न हुआ।
- जनवरी 2023 में शिकायतकर्ता ने गुना में FIR दायर की, जिसमें Section 34 IPC और Dowry Prohibition Act की धारा 3 एवं 4 के तहत अपराधों का आरोप लगाया गया।
- उसने DV Act का भी हवाला दिया, जिसमें मानसिक उत्पीड़न, छिपी कैमरों द्वारा निगरानी, आंदोलन प्रतिबंध और लाइसेंस प्राप्त आग्नेयास्त्र से जुड़े धमकियों का उल्लेख किया गया।
- Madhya Pradesh High Court ने मामलों को खारिज करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसने प्राथमिक आरोपों को मान्य किया।
- Supreme Court ने कहा कि रिश्तेदारों द्वारा केवल “समर्थन” या “हस्तक्षेप न करने” से आपराधिक भागीदारी नहीं बनती।