Supreme Court ने ‘Saving’ Former CJI के लिए वकील के फीस के दावे को खारिज किया
उच्चतम Supreme Court ने 12 March 2026 को Advocate Ashok Pandey द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने Union Government से Rs 1 crore की फीस की मांग की थी, जो कथित तौर पर पूर्व CJI Dipak Misra की रक्षा के लिए मामलों को दायर करने के लिए थी। बेंच, जिसमें CJ Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice Vipul Pancholi शामिल थे, ने याचिका को “misconceived” कहा और Allahabad High Court द्वारा पहले खारिज किए जाने को बरकरार रखा।
मुख्य विकास
- Supreme Court बेंच ने Pandey की Rs 1 crore फीस की याचिका को खारिज कर दिया, इसे misconceived कहा।
- Court ने Pandey के Article 134A के तहत अपील प्रमाणपत्र के अनुरोध को भी खारिज कर दिया।
- बेंच ने उजागर किया कि Pandey ने कोई खर्च नहीं किया था, उनके व्यक्तिगत उपस्थिति और उन्होंने दावा की गई Rs 2 lakh की मामूली राशि को नोट किया।
- CJI ने Pandey के “Hon’ble” उपाधि के उपयोग पर सवाल उठाया, जब उन्होंने पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ “nasty allegations” किए।
- Allahabad High Court, High Court में, ने पहले ही याचिका को खारिज कर दिया था और अपील प्रमाणपत्र से इनकार कर दिया था।
महत्वपूर्ण तथ्य
1. Petitioner’s Claim: Pandey ने तर्क दिया कि उन्होंने Supreme Court में कई मामलों को दायर किया ताकि Justice Misra की इम्पीचमेंट को रोका जा सके, और “social service” के लिए मुआवजा मांगा। उन्होंने लगभग Rs 2 lakh के खर्च का दावा किया, जो उन्होंने अपनी बेटी से उधार लिया था।
2. Impeachment Background: अप्रैल 2018 में, Rajya Sabha के सदस्य (सात पार्टियों के 71) ने Justice Misra की इम्पीचमेंट के लिए नोटिस पेश किया। तब के Vice‑President और Rajya Sabha Chairman Venkaiah Naidu ने इस नोटिस को अस्वीकार कर दिया, क्योंकि इसमें कोई मेरिट नहीं था।
3. Legal Procedure: Pandey की रिट याचिका ने President of India को उनके प्रतिनिधित्व की अस्वीकृति को चुनौती दी।