लखनऊ स्थित BSIP द्वारा किए गए हालिया शोध से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश के बेतवा‑यमुना संगम में बच्चों को विषाक्त धातुओं के संपर्क में असमान रूप से अधिक जोखिम है। यह अध्ययन, Nature Scientific Reports में प्रकाशित, व्यापक जल‑गुणवत्ता निगरानी को संभाव्य जोखिम मूल्यांकन के साथ मिलाकर गैर‑कैंसरजन्य और कैंसरजन्य दोनों खतरों को मात्रात्मक रूप से प्रस्तुत करता है।
Key Developments
- बेतवा और यमुना नदियों के विभिन्न बिंदुओं से एकत्रित सतही जल नमूनों का आर्सेनिक, सीसा, कैडमियम और अन्य सूक्ष्म धातुओं के लिए विश्लेषण किया गया।
- जोखिम मूल्यांकन में 10,000 पुनरावृत्तियों के साथ Monte Carlo simulation का उपयोग किया गया, जिसमें जल सेवन, शरीर का वजन और मौसमी प्रदूषण स्तरों में परिवर्तन शामिल थे।
- बच्चों में सुरक्षा मानकों से अधिक hazard index (HI) ~67% सिम्युलेटेड परिदृश्यों में दिखा, जो उच्च गैर‑कैंसरजन्य जोखिम को दर्शाता है।
- आर्सेनिक के संपर्क ने वास्तविक संपर्क स्थितियों में महत्वपूर्ण कैंसरजन्य जोखिम प्रस्तुत किया।
- अध्ययन प्राकृतिक (भौगोलिक) और मानवजनित स्रोतों जैसे कृषि अपवाह, अपरिष्कृत अपशिष्ट, औद्योगिक निकास, थर्मल पावर प्लांट और शहरी सीवेज के संयुक्त प्रभाव को उजागर करता है।
Important Facts
संगम एक मिश्रण क्षेत्र के रूप में कार्य करता है जहाँ रासायनिक रूप से भिन्न जल धातु की गतिशीलता को बढ़ाते हैं। गंगा मैदानी क्षेत्र की जलभृतियों, जिन्हें पहले प्रमुख सिंक माना गया था, उच्च प्रवाह के दौरान संग्रहीत धातुओं को जलस्तर में पुनः जारी कर सकते हैं, जिससे संपर्क की संभावना बढ़ती है। यह शोध इस बात को रेखांकित करता है कि पारंपरिक औसत‑संकेंद्रण मूल्यांकन बच्चों जैसे संवेदनशील समूहों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिनका शरीर का वजन कम और प्रति किलोग्राम जल सेवन अधिक होने के कारण जोखिम बढ़ जाता है।
UPSC Relevance
- DST‑नेतृत्व वाले अनुसंधान ढाँचों को समझना पर्यावरणीय निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर GS‑III प्रश्नों के उत्तर देने में सहायक है।
- विधि जोखिम‑मूल्यांकन उपकरणों (HI, Monte Car