समीक्षा
On 26 March 2026, a ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) चूजा कच्छ, गुजरात के घास के मैदानों में निकला, जो इस प्रजाति के लिए पहली सफल इंटर‑स्टेट संरक्षण पहल को चिह्नित करता है। यह निकास Project GIB ‘jumpstart’ दृष्टिकोण के माध्यम से प्राप्त हुआ, जिसे MoEFCC ने राजस्थान और गुजरात के वन विभागों तथा Wildlife Institute of India के साथ समन्वयित किया।
मुख्य विकास
- रजस्थानी प्रजनन केंद्र से गुजरात तक एक कैप्टिव‑ब्रीड GIB अंडे का 770‑km सड़क यात्रा, जो पोर्टेबल इनक्यूबेटर में 19 घंटे से अधिक समय तक चली।
- अंडे को 22 March 2026 को एक मादा GIB (अगस्त 2025 में टैग किया गया) के घोंसले में रखा गया, जब पक्षी ने एक निष्फल अंडा दिया था।
- मादा ने इन्क्यूबेशन पूरा किया और चूजा 26 March 2026 को निकला; फील्ड टीमें अब प्राकृतिक परिस्थितियों में उसकी वृद्धि की निगरानी कर रही हैं।
- रजस्थान (Sam और Ramdevra) में वर्तमान प्रजनन केंद्र जनसंख्या 73 पक्षी है, जिसमें इस मौसम में पाँच नए चूजे जोड़े गए हैं।
- मंत्रालय ने GIBs के rewilding की दिशा में दीर्घकालिक रणनीति के रूप में योजना की घोषणा की।
महत्वपूर्ण तथ्य
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को IUCN रेड लिस्ट पर Critically Endangered वर्गीकृत किया गया है, जिसमें जंगली में 200 से कम व्यक्तियों का शेष है। इस प्रयास से पहले, कच्छ में केवल तीन मादा GIBs बची थीं, जिससे प्राकृतिक प्रजनन लगभग असंभव था। सफल अंडा स्थानांतरण इंटर‑स्टेट वन्यजीव हस्तक्षेपों की लॉजिस्टिक संभाव्यता दर्शाता है।
UPSC प्रासंगिकता
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